तुलसीमाता तुम्हें प्रणाम महिमा तेरी अपरंपारविष्णुप्रिया वृंदा हैं नाम जाने तुमको हैं संसार चन्दन तिलक लगाएँ तुमको अक्षद पुष्प चढाएँ हमकरें आरती श्रद्धा से हम गुरू प्रीति न होवै कम जिसके घर में वास तुम्हारा प्रभु सदा हैं उसके पासतेरे पूजन से बढ़ता हैं हरि भक्ति में दृढ़ विश्वास प्रातःकाल तुमको जल अर्पित करता हैं जो नित्य प्रणामपरिक्रमा तुलसी की …
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