द्वारका में भगवान श्री कृष्ण के एक लाख अस्सी पुत्र थे। उनमें साम्ब अत्यंत गुणवान तथा रूपवान थे। एक बार देवर्षि नारद भगवान श्रीकृष्ण के दर्शनार्थ द्वारकापुरी पधारे। उन्हे देखकर सब यादव कुमारों ने प्रणाम करके उनका सम्मान किया, किंतु साम्ब ने अपने सौन्दर्य के गर्व से उन्हें प्रणाम नहीं किया, अपितु उनकी वेषभूषा को देखकर हंस पड़े। साम्ब का …
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