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तांडव गति मुंडन पे नाचत गिरिधारी


तांडव गति मुंडन पै नाचत गिरिधारी,
पं पं पं पग पटकत्,
फं फं फं फननि परत,
बिं बिं बिं विनति करत,
नाग वधु हारी।।

शशिक शशिक शनकादिक्
नं नं नं नारद मुनि,
मं मं मं महादेव,
बं बं बं बलिहारि ,

विविध विविध विधाधर,
दं दं दं देव सकल,
गं गं गं गुनि गंधर्व नाचत दे तारि,

सूरदास प्रभु की वाणी
किं किं किनहु ना जानि
चं चं चं चरण परत,
निर्भय कियो काली,
तांडव गति मुंडन पे नाचत गिरिधारी,,,,,,,

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