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तेरी मुरली बड़ी चितचोर रे


कान्हा ने एसी है मुरली भजाई,
सुन ने को सारी ही गोपी है आई
तेरी मुरली बड़ी चितचोर रे
मेरा दिल पे नही है अब जोर रे,

तेरी इस बंसी के सब है दीवाने
लगता है प्यारी सी धुन जो भ्जाने
इक दिन तू मुझको भी मुरली बना ले
अपने अधिरण पे कान्हा सजा ले
मेरी ईशा नही है कोई और वो
मेरा दिल पे नही है अब जोर रे,

तेरी मुरली पे हए हो गई फ़िदा मैं
अब न रह पाउगी तुझसे जुदा मैं
जाने क्या मुरली में एसी बात है
प्रेम के जैसी हो रही बरसात है
खिचे मन की मेरे दिल में डोर रे
मेरा दिल पे नही है अब जोर रे,,,,,,,

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