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तिरंगा ही घर घर सजा


ओ तिरंगा ही घर घर सजा
और कोई नही अब भजा
वो तिरंगा ही घर घर सजा

इस में रेहते है राम रहीमा
इस धरती को केहते है माँ
इस तिरंगे की हम सब प्रजा
वो तिरंगा ही घर घर सजा

रंग बंसती है बल्दानी ये है आजादी की निशानी
जो रंगे वो ही जाने मजा
वो तिरंगा ही घर घर सजा

मनो हसन की मीठी वाणी चुनरी अजाज़ ने रंग ली धानी
शान से गाये बाली रिज़ा
वो तिरंगा ही घर घर सजा……………

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