एक बार एक भेड़िया, किसी पहाड़ी झरने पर, ऊपर की ओर पानी पी रहा था। उसकी दृष्टि नीचे की ओर पानी पी रहे एक मेमने पर पड़ी। मेमने के नरम माँस को खाने की कल्पना से ही भेड़िए के मुँह में पानी भर आया और वह तरकीब सोचने लगा।
उसने मेमने को डाँटते हुए कहा, “अरे ओ मेमने! इस पानी को गंदा करने का तुम्हारा साहस कैसे हुआ? देखते नहीं हो, मैं पानी पी रहा हूँ…’ “
मेमना भेड़िए को देखकर डर गया फिर भी साहस बटोर कर बोला , “श्रीमान्! मैं भला पानी कैसे गंदा कर सकता हूँ? पानी तो आपकी ओर से बहकर नीचे आ रहा है।
“ठीक है-ठीक है, पर तुमने मुझे पिछले वर्ष गाली क्यों दी थी?” क्रोधित भेड़िए ने पूछा।
सहमे हुए मेमने ने कहा, “मैं तो कुल 6 महीने का हूँ… आपको साल भर पहले गाली कैसे दे सकता हूँ? मेरा तो जब जन्म ही नहीं हुआ था…” और वह काँपने लगा।
“तो फिर तुम्हारे पिता होंगे। मैं तुम्हें नहीं छोडूँगा…” और भेड़िया मेमना पर टूट पड़ा।
शिक्षा : झगड़ालू झगड़े का कोई न कोई बहाना ढूँढ ही लेते हैं।
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