रल मिल सखियाँ कहने आई,
सुनों यशोदा माई,
अपने कान्हा को समझाओ,
करता है चतुराई,
यशोदा तेरा लल्ला,
तुफानी हो गया,
मन की करने वाला,
मनमानी हो गया,
यशोदा तेरा लल्ला,
तूफानी हो गया।
रोज वो संग लेकर ग्वालों को,
ऐसे खेल खिलाये,
गोकुल के घर घर में घुसकर,
माखन चुरा के खाए,
नंदलाल का छोरा,
परेशानी हो गया,
यशोदा तेरा लल्ला,
तूफानी हो गया……
हम सब सखियाँ जब यमुना से,
पानी भर कर लाएं,
कान्हां तेरा रोज गुलेल से,
मटकी फोड़ गिराए,
कौन भरेगा हमरा,
जो हानि हो गया,
यशोदा तेरा लल्ला,
तूफानी हो गया……
कुछ कान्हां को कहते छलिया,
कुछ कहे माखन चोर,
कुछ ने बोला लीलाधारी,
कुछ कहे मटकी फोड़,
गोकुल की गलियों की,
कमल कहानी हो गया,
यशोदा तेरा लल्ला,
तूफानी हो गया……
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