Wednesday , 13 September 2017
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भिखारी की कहानी

beggar-ki-kahani

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story of begger

एक राजधानी में एक भिखारी सड़क के किनारे बैठ कर बीस-पच्चीस वर्षों तक भीख मांगता रहा। फिर मौत आ गई, फिर मर गया। जीवन भर यही कामना की कि मैं भी सम्राट हो जाऊं। कौन भिखारी ऐसा है जो सम्राट होने की कामना नहीं करता? जीवन भर हाथ फैलाए खड़ा रहा रास्तों पर। लेकिन हाथ फैला कर, एक-एक पैसा मांग कर कभी कोई सम्राट हुआ है? मांगने वाला कभी सम्राट हुआ है? मांगने की आदत जितनी बढ़ती है, उतना ही बड़ा भिखारी हो जाता है, सम्राट कैसे हो जाएगा?

तो पच्चीस वर्ष पहले छोटा भिखारी था, पच्चीस वर्ष बाद पूरे नगर में प्रसिद्ध भिखारी हो गया था, लेकिन सम्राट नहीं हुआ था। फिर मौत आ गई। मौत कोई फिकर नहीं करती। सम्राटों को भी आ जाती है, भिखारियों को भी आ जाती है। और सच्चाई शायद यही है कि सम्राट थोड़े बड़े भिखारी होते हैं, भिखारी जरा छोटे सम्राट होते हैं। और क्या फर्क होता होगा?

वह मर गया भिखारी। तो गांव के लोगों ने उसकी लाश को उठवा कर फिंकवा दिया। फिर उन्हें लगा कि पच्चीस वर्ष एक ही जगह बैठ कर वह भीख मांगता रहा। सब जगह गंदी हो गई। गंदे चीथड़े फैला दिए हैं। सब फिंकवा दिया। फिर किसी को खयाल आया कि पच्चीस वर्ष तक जमीन भी गंदी कर दी। थोड़ी जमीन भी उखाड़ कर थोड़ी मिट्टी भी साफ कर दो।

ऐसा ही सब व्यवहार करते हैं, मर गए आदमी के साथ। भिखारियों के साथ ही करते हों, ऐसा नहीं। जिनको प्रेमी कहते हैं, उनके साथ भी यही व्यवहार होता है।

उखाड़ दी थोड़ी मिट्टी खोद डाली। मिट्टी खोदी तो नगर दंग रह गया! भीड़ लग गई। सारा नगर वहां इकठ्ठा हो गया। वह भिखारी जिस जगह बैठा था, वहां बड़े खजाने गड़े हुए थे। सब कहने लगे, कैसा पागल था! मर गया पागल, भीख मांगते-मांगते! जिस जमीन पर बैठा था, वहां बड़े हंडे गड़े हुए थे, जिनमें बहुमूल्‍य हीरे-जवाहरात थे, जिस पर वह बैठा हुआ था! वह उन लोगों की तरफ हाथ पसारे रहा जो खुद ही भिखारी थे, जो खुद ही दूसरों से मांग-मांग कर ला रहे थे। वे भी अपनी जमीन नहीं खोदे होंगे। उसने भी अपनी जमीन नहीं खोदी। फिर गांव के लोग कहने लगे, बड़ा अभागा था।

मैं भी उस गांव में गया था। मैं भी उस भीड़ में खड़ा था। मैंने लोगों से कहा : उस अभागे की फिकर छोड़ो। दौड़ो अपने घर, अपनी जमीन तुम खोदो। कहीं वहां कोई खजाना तो नहीं? पता नहीं, उन गांव के लोगों ने सुना कि नहीं। आपसे भी यही कहता हूं : अपनी जमीन खोदो, जहां खड़े हैं वहीं खोद लें। कहता हूं : वहां खजाना हमेशा है!

लेकिन हम सब भिखारी हैं और कहीं मांग रहे हैं। प्रेम के बड़े खजाने भीतर हैं, लेकिन हम दूसरों से मांग रहे हैं कि हमें प्रेम दो! पत्नी पति से मांग रही है, मित्र मित्र से मांग रहा है कि हमें प्रेम दो! जिनके पास खुद ही नहीं है, वे खुद दूसरों से मांग रहे हैं कि हमें प्रेम दो! हम उनसे मांग रहे हैं! भिखारी भिखारीयों से मांग रहे हैं! इसलिए दुनिया बड़ी बुरी हो गई है। लेकिन अपनी जमीन पर, जहां हम खड़े हैं, कोई खोदने की फिकर नहीं करता।

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In a capital, a beggar sat on the road and kept begging for twenty-five years. Then death came, then died. Throughout my life, I wish that I too should become emperor. Who is the beggar who does not wish to be the emperor? On the paths of life standing on hand spread all over. But by stretching out the hands, has any monarch ever demanding a single penny? The monarch has ever been emperor? As the habit of demanding increases, the more beggars becomes, how will the emperor become?
Twenty-five years ago, there was a small beggar, after twenty five years, there was a famous beggar in the entire town, but the emperor was not. Then death came. Death does not make any difference. Emperors also come, the beggars also come. And the truth is that the monarch is just a little beggar, the beggars are just small emperors. And what would be the difference?
She died beggar So the people of the village raised his body and waved it. Then he thought that he was sitting in the same place for twenty-five years and kept asking for begging. Everything became filthy The dirty spots are spread out. All gave out Then someone came to realize that the land was filthy for twenty-five years. Boil a little ground and even clean the soil.
They behave like all, with the dead man. Do it with beggars, not so. Those who are called lovers also have this behavior with them.
Dug up the dug a little dirt. Dug the soil, the city was stunned! A crowd formed. The whole city was gathered there. The place where the beggar was seated, there were huge treasures buried. All started saying, how crazy it was! Died mad, begging-demanding! On the land that was sitting on it, there were huge hounds, in which there were precious diamonds and jewels on which he was sitting! He kept on hand towards those people who were beggars themselves, who themselves were demanding from others. They will not even dig their land. He did not even dig his land. Then the people of the village started saying, It was a big disadvantage.
I too went to that village. I was also standing in that crowd. I said to the people: Leave the faint of the unfortunate. Run your house, dig your land you Is there any treasure anywhere? Do not know, the people of those villages have heard or not. Say this to you: Dig your land, dig where you are standing. Say: There is always treasure!
But we are all beggars and demanding somewhere. There are big treasures of love within, but we are demanding from others to love us! Wife is demanding from husband, friend friend is asking that give us love! Those who do not have themselves, they themselves are demanding from others that love us! We are asking them! The beggars are demanding from beggars! Therefore the world has become very bad. But on our own land, where we stand, no one cares about digging.

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