Tuesday , 19 September 2017
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गणेशजी ने यूं चकनाचूर किया था कुबेर का घमंड

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गणेशजी ने यूं चकनाचूर किया था कुबेर का घमंड

गणेशजी ने यूं चकनाचूर किया था कुबेर का घमंड

एक बार की बात है। कुबेर को अपने धन-वैभव पर बहुत अभिमान हो गया था। उन्होंने सोचा कि मेरे पास इतनी समृद्धि है, तो क्यों न मैं शंकरजी को अपने घर पर भोजन का न्योता दूं औैर उन्हें अपना वैभव दिखाऊं। यह विचार लेकर कुबेर कैलाश पर्वत गए और वहां शंकरजी को भोजन पर पधारने का न्योता दिया।

शंकरजी को कुबेर के आने का उद्देश्य समझ आ गया था। वे समझ गए थे कि कुबेर भोजन के बहाने अपना वैभव दिखाना चाहते हैं। उन्होंने कुबेर से कहा, हम तो नहीं आ सकेंगे। आप इतने आदर से न्योता देने आए हैं तो हम गणेश को भेज देंगे।

शंकरजी और माता पार्वती ने गणेश से कुबेर के साथ जाने को कहा। गणेश सहज ही राजी हो गए। गणेश को भी ज्ञात हो गया था कि कुबेर ने उन्हें भोजन पर क्यों बुलाया है और गणेश उनका अभिमान तोड़ना की युक्ति में जुट गए। वे अपना साथ मूशक को भी ले गए।

कुबेर के महल में गणेश और उनके मूशक को भोजन परोसना शुरू किया गया दिखावे के लिए सोने-चांदी के पात्रों में अति स्वादिष्ट पकवान परोसे गए। गणेश ने एक-एक कर उन्हें खाना शुरू किया। कुछ ही समय में सारे पकवान समाप्त हो गए। गणेश की भूख शांत होना का नाम नहीं ले रही थी।
अब उन्होंने बर्तन खाने शूरू कर दिए। हीरे-मोती, जवाहरात सब खाने के बाद भी गणेश की भूख शांत नहीं हुई। कुबेर परेशान हो गए, लेकिन उन्हें अपनी भूल का भी अहसास हो गया था। घबराकर वे शंकरजी के पास आए और हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए बोले कि मैं अपने कर्म से शर्मिंदा हूं और मैं समझ गया हूं कि मेरा अभिमान आपके आगे कुछ नहीं। तब कहीं जाकर गणेश लौटे, लेकिन धन के देवता को सबक सीखाने में कामयाब रहे।

Hindi to English 

once upon a time. Kuber was very proud of his wealth. They thought that I had such prosperity, why not I invite Shankarji to my house at meal and show them my glory. With this thought, Kuber went to Kailash Mountain and invited Shankarji to come to the meal.

Shankarji understood the purpose of Kubera’s arrival They understood that Kuber wants to show their glory on the pretext of food. They told Kuber, we will not be able to come. If you have come to honor so much, we will send it to Ganesh.

Shankaraji and Mata Parvati asked Ganesh to go with Kuber. Ganesh has agreed with ease. Ganesha also had known that why Kuber invited him to the meal and Ganesh got involved in breaking his pride. They also took Mushkak along with them.

In Kuber’s palace, Ganesh and his peacock were started to serve food. A gourmet dish was served in gold and silver characters to showcase. Ganesh started eating them one by one. Soon all the dishes were finished. Ganesha’s hunger was not taking the name of being calm.

Now they started eating utensils. Ganesha’s appetite was not solved even after eating all the jewels, gems and diamonds. Kuber became disturbed, but he also realized his mistake. He came to Shankarji and added his hand to apologize and said that I am embarrassed with my karma and I understand that my pride is nothing but you ahead of me. Then Ganesh returned and went, but managed to teach a lesson to the god of wealth.

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