Thursday , 13 July 2017
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शांति चाहिए तो पहले विवेक जागृत कीजिए

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शांति चाहिए तो पहले विवेक जागृत कीजिए

शांति चाहिए तो पहले विवेक जागृत कीजिए

संत अनाम टीले पर बैठे हुए अस्त होते सूर्य को देख रहे थे कि एक व्यक्ति आया और अभिवादन करके उनके सामने चुपचाप खड़ा हो गया।

अनाम ने मुस्कुराते हुए पूछा मेरे लिए कोई सेवा। व्‍यक्‍ित ने जिज्ञासापूर्ण दृष्टि से अनाम की ओर देखते हुए कहा- आप बड़े शांत, प्रसन्न और सुखी प्रतीत होते हैं। मुझे लगता है कि आप शांति और प्रसन्नता के भंडार है।’ संत ने कहा, आपका प्रयोजन?

आगंतुक ने कहा कि, ‘मैं संसार का सर्वाधिक धनी व्यक्ति हूं। दो वर्ष पहले जब मैं विश्व भ्रमण के लिए निकला, तो मेरे एक मित्र ने शांति और सुख लाने को कहा था। संसार की बड़ी से बड़ी फर्मों में, विश्व के बड़े से बड़े धर्मस्थलों में, संतों और ऋर्षियों के आश्रम में, कहीं भी ये वस्तुएं मुझे नहीं मिलीं। क्या आप मेरे लिए किसी भी कीमत में ये वस्तुएं दे सकते हैं।

संत ने कहा, अवश्य। पर क्या तुम्हारे पास कागज और कलम है? आगंतुक ने दोनों चीजें निकलाकर संत को दे दीं। संत ने कागज पर कुछ लिखा और उससे कहा- इसमें शांति, प्रसन्नता और सुख की नुस्खा लिखा है।

धन्यवाद कहकर वह आगंतुक अपने आप चला गया। उसे खोलकर पढ़ते ही धनिक के मित्र ने कहा, मुझे शांति मिल गई। प्रसन्नता तथा सुख भी। दरअसल, कागज में लिखा था कि, जिसके अंतःकरण में विवेक जागृत हो जाता है और संतोष की धारा बहती है, वहीं शांति निवास करती है। प्रसन्नता और सुख शांति के प्रसाद हैं।

In English

Saints were sitting on the mound, sitting on the sun, watching the sun that a person came and greeted him silently in front of them.

Anonymous asked smiling, no service for me Looking at the anonymity with a pragmatic look, the person said – you seem to be very calm, happy and happy. I think that you are the stock of peace and happiness. ‘ The saint said, your purpose?

The visitor said, ‘I am the wealthiest person in the world. Two years ago when I went out for a world tour, one of my friends had asked to bring peace and happiness. In the largest firms of the world, in these large shrines of the world, in the ashram of saints and rishis, I have not found these objects anywhere. Can you give me these items at any cost?

The saint said, of course. But do you have paper and pen? The visitor turned out both things and gave it to the saint. The saint wrote something on the paper and told him – it has written a recipe of peace, happiness and happiness.

Thanks, the visitor went by himself. As soon as he opened it, a friend of Dhanik said, “I got peace. Happiness and happiness also In fact, it was written in the paper that, in whose hearts wisdom awakens and the stream of content flows, peace resides there. Pleasures and happiness are offerings of peace.

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