Wednesday , 13 September 2017
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नई सोच नई दिशा

new-thinking-new-direction

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एक घर के करीब से गुज़र रहा था अचानक मुझे घर के अंदर से एक दस साल के बच्चे की रोने की आवाज़ आई आवाज़ में इतना दर्द था कि अंदर जा कर बच्चा क्यों रो रहा है यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सकाअंदर जा कर मैने देखा कि माँ अपने बेटे को धीरे से मारती और बच्चे के साथ खुद भी रोने लगती

मै ने आगे हो कर पूछा ऑन्टी क्यों बच्चे को मार रही हो जबकि खुद भी रोती हो…..

उसने जवाब दिया की आप तो जानते ही होंगे कि इसके पिताजी का देहांत हो गया है। हम बहुत गरीब हैं। उनके जाने के बाद मैं फैक्ट्री में मजदूरी करके घर और इसके पढ़ाई का खर्च बहुत कठिनाई के साथ उठाती हूँ यह देर से स्कूल जाता है और देर से घर आता हैजाते हुए रास्ते मे कहीं खेल कूद में लग जाता है और पढ़ाई की तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देता है जिसकी वजह से रोज़ाना अपनी स्कूल की यूनिफार्म गन्दी कर लेता हैमै ने बच्चे और उसकी माँ को थोड़ा समझाया और चल दिया…..

कुछ दिन ही बीते थेएक दिन सुबह सुबह कुछ काम से सब्जी मंडी गयातो अचानक मेरी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना घर से मार खाता था

क्या देखता हूँ कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और जो दुकानदार अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो उनसे कोई सब्ज़ी ज़मीन पर गिर जाती वह बच्चा उसे फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता

मै यह माजरा देख कर परेशान हो रहा था कि चक्कर क्या हैमै उस बच्चे को चोरी चोरी फॉलो करने लगा

जब उसकी झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह सड़क के किनारे बैठ कर उसे ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा कर बेचने लगामुंह पर मिट्टी गन्दी वर्दी और आंखों में नमी , ऐसा महसूस हो रहा था कि ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में पहली बार देख रहा हूँ कि अचानक एक आदमी अपनी दुकान से उठा जिसकी दुकान के सामने उस बच्चे ने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी , उसने आते ही एक जोरदार धक्का मार कर उस नन्ही दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाज़ुओं से पकड़ कर उस बच्चे को भी उठा कर धक्का दे दिया

वह बच्चा आंखों में आंसू लिए चुप चाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा करने लगा और थोड़ी देर बाद अपनी सब्ज़ी एक दूसरे दुकान के सामने डरते डरते लगा ली

भला हो उस दुकानदार का जिसकी दुकान के सामने इस बार उसने अपनी नन्ही दुकान लगाई उस ने बच्चे को कुछ नहीं कहाथोड़ी सी सब्ज़ी थी ऊपर से दूसरी दुकानों से कम कीमत की थी इसलिए जल्द ही बिक गयी

और वह बच्चा उठा और बाज़ार में एक कपड़े वाले की दुकान में घुस गया और दुकानदार को वह पैसे देकर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और बिना कुछ कहे वापस स्कूल की ओर चल पड़ा कौतूहल वश मैं भी उसके पीछे पीछे चल रहा था

बच्चे ने रास्ते में अपना मुंह धोया और स्कूल चल दियामै भी उसके पीछे स्कूल चला गया

जब वह बच्चा स्कूल गया तो एक घंटा लेट हो चुका थाजिस पर अध्यापक जी ने डंडे से उसे खूब मारा

मैने जल्दी से जाकर अध्यापक जी को मना किया कि छोटा बच्चा है इसे मत मारो

अध्यापक कहने लगे कि यह रोज़ाना एक डेढ़ घण्टे लेट से ही आता है मै रोज़ाना इसे सज़ा देता हूँ कि डर से स्कूल समय पर आए और कई बार मै इसके घर पर भी सुचना दे चुका हूंखैर बच्चा मार खाने के बाद क्लास में बैठ कर पढ़ने लगामैने उसके शिक्षक का मोबाइल नम्बर लिया और घर की ओर चल दिया घर पहुंच कर ज्ञात हुआ कि जिस कार्य के लिए मैं सब्ज़ी मंडी गया था उसको तो भूल ही गया।

दूसरी ओर बच्चे ने घर कर माँ से एक बार फिर मार खाईसारी रात मेरा सर चकराता रहा

सुबह उठकर जल्दी से तैयार हुआ और ईश्वर की आराधना के उपरांत शिक्षक महोदय को मोबाइल पर फोन कर कहा कि हर हालत में तुरंत सब्जीमंडी पहुंचें। शिक्षक महोदय ने मेरे अनुरोध को स्वीकार किया।

बच्चे का स्कूल जाने का समय हुआ और बच्चा घर से सीधा सब्जीमंडी अपनी नन्ही सी दुकान की व्यवस्था करने चल पड़ा। मै ने उसके घर जाकर उसकी माँ को कहा कि ऑन्टी आप मेरे साथ चलो मै तुम्हे बताता हूँ आप का बेटा स्कूल क्यों देर से जाता है

वह फौरन मेरे साथ क्रोध मे यह बड़बड़ाते हुए चल पड़ीं कि आज उस लड़के को छोडूंगी नहीं उसे आज बहुत मार मारूंगी। मंडी में बच्चे के शिक्षक भी चुके थे।

हम तीनों सब्जीमंडी के एक स्थान पर आड़ लेकर खड़े हो गए जहाँ से उस बच्चे को देखा जा सकता था लेकिन वो हमें नहीं और उस लड़के को छुप कर देखने लगे।
प्रतिदिन की भाँति उसको आज भी उसे काफी लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े और आखिरकार वह लड़का अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल दिया। मेरी नज़र उसकी माँ पर पड़ी तो देखता हूँ कि वो बहुत ही दर्द भरी सिसकियां लेकर रो रही थी।

मै ने स्कूल के अध्यापक जी की ओर देखा तो बहुत करुणा के साथ उनके नेत्रों से अश्रु बह रहे थे। दोनो के रोने में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन्हों ने बहुत बड़ा अपराध किया हो और आज उन को अपनी गलती का पछतावा हो रहा हो। मैंने दोनों को सांत्वना देते हुए वहां से विदा किया।

उसकी माँ रोते रोते घर चली गयी और अध्यापक जी भी सजल नेत्रों के साथ स्कूल चले गए।

पूर्व की भाँति बच्चे ने दुकानदार को पैसे दिए और आज उसको दुकानदार ने कपडे देते हुए कहा कि बेटा आज कपड़ों के सारे पैसे पूरे हो गए हैं।

बच्चे ने उन कपड़ों को पकड़ कर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गयाआज भी एक घंटा लेट था वह सीधा आचार्य जी के पास गया और बैग डेस्क पर रखकर मार खाने के लिए अपने हाथ आगे कर दिए कि शिक्षक डंडे से उसे मार ले।

आचार्य अपनी कुर्सी से उठे और बच्चे को गले लगाकर सुबक पड़े कि मैं भी देख कर अपने आंसुओं पर नियंत्रण ना रख सका।

मै ने अपने आप को संभाला और आगे बढ़कर बच्चे से पूछा कि यह जो बैग में कपडे हैं वो है वह किसके लिए हैबच्चे ने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ फैक्ट्री में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं। कोई कपडा सही ढंग से तन ढांपने वाला नहीं और और हमारे माँ के पास पैसे नही हैं इसलिये इस दिवाली पर अपने माँ के लिए यह सलवार कमीज का कपडा खरीदा है।

मैंने बच्चे से पूछा तो यह कपडा अब घर ले जाकर माँ को दोगे ?

परंतु उसके उत्तर ने मेरे और उस बच्चे के शिक्षक के पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकाल दी….

बच्चे ने जवाब दिया नहीं अंकल छुट्टी के बाद मैं इसे दर्जी को सिलाई के लिए दे दूँगा।

रोज़ाना स्कूल से जाने के बाद काम करके थोड़े थोड़े पैसे सिलाई के लिए दर्जी के पास जमा किये हैं

 आचार्य जी और मैं यह सोच कर रोते जा रहे थे कि आखिर कब तक हमारे समाज में गरीबों और विधवाओं के साथ ऐसा होता रहेगा उन के बच्चे होलीदिवाली जैसी खुशियों को मानाने के लिए कठोर परीक्षाओं का परिश्रम के साथ सामना करते रहेंगे आखिर कब तक!

क्या ईश्वर ने इन जैसे गरीब अनाथ बच्चों और विधवाओं को त्योहारों को प्रसनन्ता के साथ मनाने का कोई हक नहीं दिया? क्या हम चन्द रुपयों का मन्दिर में चढ़ावा या दान दे कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी से हट सकते हैं?

क्या हम अपनी खुशियों के अवसरों पर अपनी व्यर्थ की इच्छाओं को कम कर थोड़े पैसे, थोड़ी खुशियां उनके साथ नहीं बाँट सकते?!!!
सोचना ज़रूर

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Suddenly, I was crying for a ten-year-old child from inside the house – there was so much pain in my voice that I could not stop myself from knowing why the baby was crying – Going inside I saw that the mother slaughtered her son and started crying herself with the child

I went ahead and asked why anunt is killing the baby while herself crying
He replied that you must know that his father has died. We are very poor. After leaving them, I wage labor in the factory and raise the expenses of the home and its studies with great difficulty.

It goes late school and comes home late by the way – wherever on the way, the game takes place in the jump and on the way to study I do not care even because of which the uniform of my school is dirty every day – I explained a little to the child and his mother and walked on

A few days passed one morning in the morning, some work went to the vegetable market – so suddenly my eyes fell on the same ten-year-old child who killed every day at home –
Do you see that the child is walking in the market and if the shopkeeper put his sacks by buying vegetables for his shops and then falling on a vegetable ground, the child would take him immediately and put him in his lap

I was troubled by seeing this magnificent thing that what is the affair – I started following the theft of that child –
When his bag was full of vegetables, he sat on the side of the road and started selling him with loud voices – mud dirty uniform on his face and humidity in the eyes,

it seemed like this that the shopkeeper is looking for the first time in life that suddenly A man picked up from his shop, in front of his shop, the child had set up his own shop, and when he came, he hit a small shop with a shock and screwed it on the road in one stroke and Hold the wings pushed to raise the child

The child again began to collect his vegetable again to tear his eyes in the eyes, and after a while he began to fear his vegetable in front of another shop –
Well, that shopkeeper whose shop was in front of this shop in front of this time, he did not say anything to the child – a little vegetable was lower than the other shops because it was sold soon.

And he picked up the child and entered a cloth shop in the market and gave the money to the shopkeeper and picked up his school bag in the shop and went back to school without saying anything. Curiosity I was also following behind him –

The child washed his face on the way and walked to school – I also went to school behind him –
When the child went to school, an hour was delayed – on which the teacher ji hit him with the sticks –
I quickly went to the teacher and told him that little kid is not killed –

The teacher said that it comes only from one and a half hour daily, and I punish every day that fear has come at school time and many times I have also given instructions on its house – after eating the child, after sitting in the class He started reading – I took the mobile number of his teacher and walked towards the house and came to know that the work I went to the vegetable market was forgotten.

On the other hand, the child came home and beat the mother once again – all night my head continued to bark –
After getting up early in the morning and after worshiping God, the teacher called the teacher on mobile and said that in every condition, immediately reach the vegetable. The teacher accepted my request.

It was time for the child to go to school and the child started to arrange his own small shop directly from the house. I went to her house and told her mother that if you come with me, I will tell you why your son goes to school late –

She immediately started fluttering in anger with me that she will not leave the boy today, she will kill a lot today. The school teacher had also come in the market.
We all got locked in one place at the place of vegetables, from which the child could be seen but he did not see us and hiding that boy and seeing them.

Like every day, he still had to reprimand and shout many people, and after that the boy sold his own vegetables and went to the clothes shop. I saw my mother lying on her mother and she was crying that she was very painful.

When I looked towards the teacher of the school, tears were blowing with their eyes with great compassion. In the crying of both of them I felt as if they had committed a great crime and today they are regretting their mistake. I sent both consolation from there, leaving them there.

Her mother went to crying crying home and the teacher went to school with even the bright eyes.
Like the former the child gave the money to the shopkeeper and today the shopkeeper gave him clothes and said that the son has completed all the clothes of the clothes today.

The child took hold of those clothes and kept it in the school bag and went to school – one hour late even today, he went straight to Acharya ji and kept the bag on the desk and handed his hand to kill him that the teacher would kill him with the sticks .

Acharya got up from his chair and embraced the child and was very happy to see that I could not even control his tears.
I handled myself and went ahead and asked the child if this is the bag in which the clothes are for whom it is for the child. The child responded crying that my mother goes to the factory to wages and her clothes are torn. There is no garment in any garment properly and and our mother has no money, so on this Diwali, she bought this Salwar kameez cloth for her mother.

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