Sunday , 18 February 2018
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उसके घर की हकीकत देख भला और मैं क्या करता: जिगर मुरादाबादी

reality-of-her-home-and-more

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शायर जिगर मुरादाबादी बहुत ही उदार और दयालु थे। मदद के लिए वह हर समय तैयार रहते थे। अपने इस स्वभाव के चलते वह काफी लोकप्रिय भी हो गए। एक बार वह अपने एक मित्र के साथ कहीं जा रहे थे। मुरादाबादी के दोस्त ने देखा कि एक व्यक्ति उन्हें देख कर आंखें चुरा रहा है।
दोस्त ने कहा-हजरत! माजरा क्या है? वह आदमी आपको देखकर इस तरह क्यों झेंप रहा था? और आंखें क्यों चुरा रहा था? अगर वह आपको जानता था तो सामने क्यों नहीं आया। दुआ सलाम करता और जनाब आप भी कुछ नहीं बोले। आप उसे जानते हैं क्या?
जिगर मुरादाबादी बोले- अच्छी तरह जनता हूं उसे। हकीकत यह है कि एक दिन इस आदमी ने मेरी जेब से पैसे चुराए थे इसलिए मुझे पहचान कर भी झेंप रहा था। मित्र ने कहा- जब तुम्हें पता चल गया कि यह वही है तो तुमने मुझे बताया क्यों नहीं? मैं उसकी खबर लेता।
मुरादाबादी ने हंसकर कहा- अरे भाई, उसकी खबर लेने के लिए मैं गया था उसके घर। पर वहां जो देखा उसे कहना जरा मुश्किल है। क्या बताऊं, उसके घर की हालत बेहद खराब थी। उसके पत्नी और बच्चों के पास खाने को कुछ नहीं था। अब तुम ही बताओ भला मैं क्या करता। मैं चुपचाप वहां से लौट आया।
जिगर मुरादाबादी का दोस्त यह सुनकर परेशान तो नहीं पर हैरान जरुर हो गया। उसके भीतर मुरादाबादी के लिए सम्मान और इज्जत का इजाफा बढ़ गया।

In English

Shire liver muradabadi was very generous and kind. He used to be ready for help all the time. Because of this nature, he became quite popular too. Once he was going somewhere with one of his friends. Moradabadi’s friend saw that a person was stealing his eyes after seeing them.
The friend said- Hazrat! What is the matter? Why was that man laughing at you like this? And why did the eyes steal? If he knew you then why did he not come in front? Dua salutes and you do not even say anything. Do you know him?
Jigar Moradabadi speaks well- he is well-publicized The reality is that one day this man had stolen money from my pocket so I was also shy by recognizing him. The friend said – When you came to know that this is the same then why did not you tell me? I took the news of him
Muradabadi laughed and said- Hey brother, I went to his house to get his news. But it is difficult to say what is seen there. What could I say, the condition of his house was very bad. His wife and children had nothing to eat. Now you only tell me what I would do. I quietly returned from there.
The friend of the lion Moradabadi was shocked to hear this, but not surprised. Within him there was an increase in honor and respect for Moradabadi.

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