Thursday , 1 June 2017
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शिव और नारायण के वर्चस्ववाद

shiv-and-narayana-domination

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parshuram

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‘परशु’ प्रतीक है पराक्रम का, ‘राम’ पर्याय है सत्य सनातन का। इस प्रकार परशुराम का अर्थ हुआ पराक्रम के कारक और सत्य के धारक। नारायण के छठे अवतार भगवान परशुराम को कभी सही परिप्रेक्ष्य में समझा ही नहीं गया। 
नारायण ने एक साथ दो अवतार क्यों लिए?? 
ऐसा हिंस्र अवतार!! 
नारायण को मनुष्य रूप में लेने की क्या अवश्यकता पड़ी?
परशुराम अवतार वास्तव में क्या है? 
शिव और नारायण के वर्चस्ववाद की स्थापना के प्रतीक रूप में कल्पित हैं क्या परशुराम??

ऐसे न जाने कितने प्रश्न कितने काल से चले आ रहे हैं। यदि आप सचमुच भगवान परशुराम के बारे में, इस अवतार के उद्देश्य को वास्तविक रूप में समझना चाहते हैं तो प्रभु शरणम् से जुड़ जाइए। इस पर आज से 10 भाग में भगवान परशुराम की कथा प्रकशित हो रही है। इतनी विस्तृत कथा आपने पहले न पढ़ी होगी। परशुराम को क्षत्रिय वर्ग का द्रोही मानते हैं तो आप भूल कर रहे हैं। वास्तव में यह व्याख्या का फेर है। इसे हम मिलकर समझेंगे प्रभु शरणम् ऐप्प में। यदि सचमुच लालसा है तो प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लें- Prabhu Sharnam. या इस लिंक से डाउनलोड करें

शास्त्रोक्त मान्यता तो यह है कि परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, अतः उनमें आपादमस्तक यानी शीश से पांव तक विष्णु ही प्रतिबिंबित होते हैं, परंतु मेरी मौलिक और विनम्र व्याख्या यह है कि ‘परशु’ में भगवान शिवसमाहित हैं और ‘राम’ में भगवान विष्णु इसलिए परशुराम अवतार भले ही विष्णु के हों, किंतु व्यवहार में समन्वित स्वरूप शिव और विष्णु का है। इसलिए मेरे मत में परशुराम दरअसल ‘शिवहरि’ हैं।

पिता जमदग्नि और माता रेणुका ने तो अपने पाँचवें पुत्र का नाम ‘राम’ ही रखा था, लेकिन तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्न करके उनके दिव्य अस्त्र ‘परशु’ (फरसा या कुठार) प्राप्त करने के कारण वे राम से परशुराम हो गए।

‘परशु’ प्राप्त किया गया शिव से। शिव संहार के देवता हैं। परशु संहारक है, क्योंकि परशु ‘शस्त्र’ है। राम प्रतीक हैं विष्णु के। विष्णु पोषण के देवता हैं अर्थात्‌ राम यानी पोषण/रक्षण का शास्त्र। शस्त्र से ध्वनित होती है शक्ति। शास्त्र से प्रतिबिंबित होती है शांति। शस्त्र की शक्ति यानी संहार। शास्त्र की शांति अर्थात्‌ संस्कार। परशुराम दरअसल ‘परशु’ के रूप में शस्त्र और ‘राम’ के रूप में शास्त्र का प्रतीक हैं। एक वाक्य में कहूँ तो परशुराम शस्त्र और शास्त्र के समन्वय का नाम है, सामर्थ्य, आत्मसम्मान के साथ अपनी धर्म, आस्था, संस्कृति व संस्कारों को सम्माननीय बनाये रखने का संतुलन जिसका संदेश है।

अक्षय तृतीया को जन्मे हैं, इसलिए परशुराम की शस्त्रशक्ति भी अक्षय है और शास्त्र संपदा भी अनंत है। विश्वकर्मा के अभिमंत्रित दो दिव्य धनुषों की प्रत्यंचा पर केवल परशुराम ही बाण चढ़ा सकते थे। यह उनकी अक्षय शक्ति का प्रतीक था, यानी शस्त्रशक्ति का। पिता जमदग्नि की आज्ञा से अपनी माता रेणुका का उन्होंने वध किया। यह पढ़कर, सुनकर हम अचकचा जाते हैं, अनमने हो जाते हैं, लेकिन इसके मूल में छिपे रहस्य को/सत्य को जानने की कोशिश नहीं करते।
यह तो स्वाभाविक बात है कि कोई भी पुत्र अपने पिता के आदेश पर अपनी माता का वध नहीं करेगा।

फिर परशुराम ने ऐसा क्यों किया? 
इस प्रश्न का उत्तर हमें परशुराम के ‘परशु’ में नहीं परशुराम के ‘राम’ में मिलता है। आलेख के आरंभ में ही ‘राम’ की व्याख्या करते हुए कहा जा चुका है कि ‘राम’ पर्याय है सत्य सनातनका। सत्य का अर्थ है सदा नैतिक। सत्य का अभिप्राय है दिव्यता। सत्य का आशय है सतत सात्विक सत्ता।परशुराम दरअसल ‘राम’ के रूप में सत्य के संस्करण हैं, इसलिए नैतिक-युक्ति का अवतरण हैं। यह परशुराम का तेज, ओज और शौर्य ही था कि कार्तवीर्य सहस्रार्जुनका वध करके उन्होंने अराजकता समाप्त की तथा नैतिकता और धर्म/न्याय का ध्वजारोहण किया।
परशुराम का क्रोध मेरे मत में रचनात्मक क्रोध है।जैसे माता अपने शिशु को क्रोध में थप्पड़ लगाती है, लेकिन रोता हुआ शिशु उसी माँ के कंधे पर आराम से सो जाता है, क्योंकि वह जानता है कि उसकी माँ का क्रोध रचनात्मक है। मेरा यह भी मत है कि परशुराम ने अन्याय का संहार और न्याय का सृजन किया।

सरल शब्दों में कहें तो सनातन ज्ञान “अहिंसा परमोधर्म, धर्महिंसा तदैव च” का अक्षरशः प्रतिपालन करने का सजीव , प्रत्यक्ष आदर्श है, भगवान श्री परशुराम.

Hindi to English

Parashu’ is the symbol of Paramakra, ‘Ram’ is synonymous with Satyaanan. Thus Parashuram means the holder of the power factor and the truth. Lord Parashuram, the sixth incarnation of Narayana, was never understood in the right perspective.
Why did Narayan get two incarnations together?
Such an incarnation !!
What was the need to take Narayana in human form?
What is Parashuram Avatar really?
What is perceived as the symbol of the supremacy of Shiva and Parasurama ??

Do not know how many questions have been running since so many periods. If you really want to understand the purpose of this incarnation in real form about Lord Parashurama, then join Lord Sharanam. From today onwards, the story of Lord Parashurama is being published in 10 episodes. You will not have read so detailed story before. If Parashurama considers the Kshatriya class to be a traitor, then you are making a mistake. In fact it is a revelation of interpretation. We will understand this together in the Lord Sharanam App. If you really crave then download it from the Play Store – Prabhu Sharnam Or download from this link

The scientific belief is that Parasurama is the sixth incarnation of Lord Vishnu, therefore, Vishnu is reflected from Shastri to his feet, but my original and humble interpretation is that Lord Parasu is Lord Shiva and Lord in ‘Ram’ Vishnu therefore, Parasurama avatar, though of Vishnu, but in the behavior of the coordinated form is Shiva and Vishnu. Therefore, in my opinion, Parshuram is actually ‘Shivahari’.

Father Jamdagni and Mata Renuka had kept the name of their fifth son as ‘Rama’, but on receiving the blessings of Lord Shiva, they received their divine weapon ‘Parashu’ (farsa or khair) due to which they became Parasuram. .

‘Parashu’ received from Shiva. Shiva is the god of slaughter. Parashu is a destroyer, because the Parshu is ‘Arms’. Ram symbols are Vishnu’s Vishnu is the god of nurturing, i.e. Ram means the science of nutrition / protection. The weapon implies the power. Shanti is reflected in scripture. The weapon of weapon is the sword. The peace of the scripture ie the sacraments Parashuram is actually a symbol of scripture in the form of ‘Parashu’ and weapon ‘Ram’. In one sentence, Parashuram is the name of the weapon and the coordination of the scriptures, the message of strength, self-esteem, the balance of keeping religion, faith, culture and values ​​honorable.

Akshay Tritiya is born, hence the weapon of Parashurama is also Akshay and the Shastra wealth is also infinite. Parshuram could only throw arrows on the pretext of the two divine bows of Vishwakarma. It was a symbol of his renewable power, that is, the weapon of weapon. They killed their mother Renuka with the order of father Jamdagni. By reading this, listening to us, we are inadvertent, weirdly, but do not try to know the hidden secret / truth in its origin.
It is natural that no son will kill his mother on the order of his father.

Then why did Parashuram do this?
The answer to this question is found in Parashuram’s ‘Parashu’ in Parashuram’s ‘Rama’. At the beginning of the article, it has been said that, ‘Ram’ is that ‘Ram’ is synonymous with Satya Santanaka. Truth means eternally moral. Truth means Divinity. Truth means continuous sattvik power. Parshuram is actually the version of truth in the form of ‘ram’, hence the revelation of the moral tactic is. It was the sharpness, ooziness and bravery of Parshuram that he killed the Kartvariya Sahasrrajnaka and ended the chaos and hoisted the flag of morality and religion / justice.
Parashuram’s anger is a creative anger in my opinion. Just as a mother slaps her baby in anger, but the crying baby sleeps comfortably on the shoulder’s shoulder, because she knows that her mother’s anger is constructive. I also do not believe that Parshuram created the battle of injustice and justice.

Simply put, the eternal knowledge is a living, direct ideal of virtually observing “Non-violence Paramodharma, Dharmhiman Tadava Ch”, Lord Shree Parashuram.

 

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