Tuesday , 11 July 2017
Latest Happenings
Home » books » ताकि मैं उन दिनों को न भूल जाऊं

ताकि मैं उन दिनों को न भूल जाऊं

so-i-those-days-to-be-not-forgotten

so-i-those-days-to-be-not-forgotten

ताकि मैं उन दिनों को न भूल जाऊं

ताकि मैं उन दिनों को न भूल जाऊं

हेनरी फोर्ड संसार के अग्रणी उद्योगपति थे। उन्होंने अमेरिका में फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना की। उनके नाम पर बनाई गई फोर्ड मोटर ने हर जगह नाम कमाया।

एक भारतीय उद्योगपति ने मोटर का कारखाना लगाने से पहले हेनरी फोर्ड से भेंट करने निश्चय किया।अमेरिका पहुंचकर उसने हेनरी फोर्ड को फोन किया और मिलने की इच्छा व्यक्त की। फोर्ड ने कहा शाम छह बजे मेरे घर पर आ जाना।

उद्योगपति उनके घर पहुंचा तो उसने देखा कि एक व्यक्ति अपने खाने के बर्तन स्वयं साफ कर रहा है। बर्तन साफ कर एक और रख देने के बाद उसने कहा कि बैठिए मुझे हेनरी फोर्ड कहते हैं।

भारतीय ने कहा कि आप इतने बड़े व्यक्ति होकर भी साधारण व्यक्तियों की तरह रहते हैं। अपना काम स्वयं करते हैं। यह काम के लिए आप नौकर भी रख सकते हैं।

फोर्ड ने उत्तर दिया- मैं शुरू से ही अपना काम स्वयं करता था, हाथों से किए गए कठोर परिश्रम के कारण ही मैं आज फोर्ड कारखाने का मालिक बन पाया हूं।

मैं उन दिनों को भूल न जाउं इसलिए अपना काम स्यवं करता हूं। संसार के इतने बड़े आदमी को इस तरह सादगी देखकर भारतीय उद्योगपति हतप्रभ हो गए।

In English

Henry Ford was the world’s leading industrialist. He established Ford Motor Company in the US Ford Motor made his name, earned the name everywhere.

An Indian industrialist decided to meet Henry Ford before applying a motor factory. After arriving in Amerika, he called Henry Ford and expressed his desire to meet him. Ford told me to come home at six in the evening.

When the industrialist reached his house, he saw that a person was cleaning his dinner utensils himself. After clearing the vessel and putting another, he said that sit down call me Henry Ford.

The Indian said that you are such a big person but live like ordinary people. Do their work themselves. You can also hire a servant for this work.

Ford replied – I used to do my work from the beginning, due to the hard work done by hands, I have become the owner of the Ford factory today.

I do not forget those days, so I do my work. Seeing such a simplicity in such a world of world, Indian industrialists became dysfunctional.

Comments

comments