Monday , 18 September 2017
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एसडीएम की कहानी

story-of-sdm

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आज स्कूल में शहर की LADY SDM आने वाली थी क्लास की सारी लड़कियां ख़ुशी के मारे फूले नहीं समां रही थी सबकी बातों में सिर्फ एक ही बात थी SDM और हो भी क्यों न आखिर वो भी एक लड़की थी पर एक ओर जब सब लड़कियां व्यस्त थी SDM की चर्चाओं में एक लड़की सीट की लास्ट बेंच पर बैठी पेन और उसके कैप से खेल रही थी उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था कौन आ रहा है और क्यों आ रहा है

वो अपने में मस्त थी वो लड़की थी आरुषि आरुषि पास के ही एक गांव के एक किसान की एकलौती बेटी थी स्कूल और उसके घर का फासला लगभग 10 किलोमीटर का था जिसे वो साइकिल से तय करती थी स्कूल में बाकि की सहेलियां उससे इसलिए ज्यादा नहीं जुड़कर रहती थी क्योंकि वो उनकी तरह रईस नहीं थी लेकिन इसमें उसका क्या दोष था खैर उसकी जिंदगी सेट कर दी गयी थी इंटरमीडिएट के बाद उसे आगे नहीं पढ़ा सकते थे क्योंकि उसके पापा पैसा सिर्फ एक जगह लगा सकते थे या शादी में और या तो आगे की पढाई में उसके परिवार में कोई भी मैट्रिक से ज्यादा पढ़ा नहीं था

 बस यही रोड मैप उसके आँखों के सामने हमेशा घूमता रहता कि ये क्लास उसकी अंतिम क्लास है और इसके बाद उसकी शादी कर दी जाएगी इसीलिए वो आगे सपने ही नहीं देखती थी और इसीलिए उस दिन एसडीएम के आने का उसपर कोई फर्क नहीं पड़ा ठीक 12 बजे SDM उनके स्कूल में आयी  यही कोई 24 -25 की साल की लड़की नीली बत्ती की अम्बेसडर गाड़ी और साथ में 4 पुलिसवाले 2 घंटे के कार्यक्रम के बाद एसडीएम चली गयी लेकिन आरुषि के दिल में बहुत बड़ी उम्मीद छोड़कर गयी उसे अपनी जिंदगी से अब प्यार हो रहा था  जैसे उसके सपने अब आज़ाद होना चाहते हो

उस रात आरुषि सो नहीं पायी  स्कूल में भी उसी उलझन में लगी रही क्या करूँ वो अब उड़ना चाहती थी फिर अचानक पापा की गरीबी उसके सपनो और मंजिलो के बीच में आकर खड़ी हो जाती वो घर वापस गयी और रात खाने के वक़्त सब माँ और पापा को बता डाला पापा ने उसे गले से लगा लिया उनके पास छोटी सी जमीन का एक टुकड़ा था कीमत यही 50000 रुपये की होगी आरुषि की शादी के लिए उसे डाल रखा था पापा ने कहा की मैं सिर्फ एक ही चीज पूरी कर सकता हूँ

तेरी शादी के लिए हो या तेरे सपने आरुषि अपने सपनों पर दांव खेलने को तैयार हो गयी इंटरमीडिएट के बाद उसके बीए में दाखिला लिया क्योंकि ग्रेजुएशन में इसकी फीस सबसे सस्ती थी  पैसे का इंतेजाम पापा ने किसी से मांग कर कर दिया पर ये उसकी मंजिल नहीं थी उसकी मंजिल तो कही और थी उसने तैयारी शुरू की सबसे बड़ी समस्या आती किताबों की  तो उसके लिए नुक्कड़ की एक पुरानी दुकान का सहारा लिया जहाँ पुरानी किताबे बेचीं या खरीदी जाती थी

ये पुरानी किताबें उसे आधी कीमत में मिल जाती थी वो एक किताब खरीदकर लाती और पढ़ने के बाद उसे बेचकर दूसरी किताब  कहते हैं न कि जब परिंदों के हौसलों में शिद्दत होती है तो आसमान भी अपना कद झुकाने लगता है आरुषि की लगन को देखकर उस दुकान वाले अंकल ने उसे किताबे फ्री में देनी शुरू की और कुछ किताबें तो खुद नयी खरीदकर दे देते और कहते कि बिटिया जब बन जाना तो सूद समेत वापस कर देना

 कुछ भी हो आरुषि इस यकीन को नहीं तोडना चाहती थी ग्रेजुएशन के 2 साल पूरे हो गए और उसकी तैयारी लगातार चलती रही सब ठीक चल रहा था कि अचानक उसके माँ की तबियत ख़राब हो गयी इलाज के लिए पैसे की जरुरत थी लेकिन पहले से की घर क़र्ज़ में डूब चूका था अंत में पापा ने जमीन गिरवी रख दी और इसी बीच उसने ग्रेजुएशन के तीसरे वर्ष में दाखिला लिया  समस्याएं दामन नहीं छोड़ रही थी

आरुषि कब तक अपने हौसलो को मजबूत बनाने की कोशिस करती आख़िरकार एक दिन मां से लिपटकर वो बहुत रोई और एक ही बात पूछी  मां हमारे कभी अच्छे दिन नहीं आएंगे   मां ने उसे साहस दिया  और फिर से उसने कोशिस की  कहते हैं न कि योद्धा कभी पराजित नहीं होते या तो विजयी होते हैं और या तो वीरगति को प्राप्त होते हैं

 23 जून हाँ ये वही दिन था जब आरुषि ने प्रारंभिक परीक्षा पास की थी  अब बारी मुख्य परीक्षा की थी और आरुषि के हौसले अब सातवें आसमान को छू रहे थे. तीन वर्ष की लगातार कठिन परिश्रम का फल था की आरुषि ने मुख्य परीक्षा भी पास कर ली अब वो अपने सपने से सिर्फ एक कदम दूर खड़ी थी पीछे मुड़कर देखती तो उसे सिर्फ तीन लोग ही नजर आते माँ , पापा और दुकान वाले अंकल आख़िरकार इंटरव्यू हुआ और अंतिम परिणाम में आरुषि ने सफलता हासिल की आरुषि को जैसे यकीन नहीं हो रहा था की हाँ ये वही आरुषि है माँ ,

पापा तो अपने आंसुओं के सैलाब को रोक नहीं पा रहे थे आरुषि अपने घर से तेजी से निकल गयी  उन्ही आंसुओं के साथ आखिर किसी और को भी तो उसे धन्यवाद देना था सीधे जाकर दुकान वाले अंकल के पास रुकी अंकल ने उसे गले से लगा लिया और खुद भी छलक गए !!
असल में ये जीत सिर्फ आरुषि की जीत नहीं थी .इस जीत में शामिल थी माँ की ममता ..पिता के हौसले और दुकान वाले अंकल का यकीन

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Today the school’s LADY SDM was coming to the school. All the girls in the class were not happy with the happiness. There was only one thing in everyone’s talk. SDM and even then why he was also a girl but on one hand when all the girls were busy In the discussions of the SDM, a girl was sitting on the seat sitting on the last bench of the seat and she was playing with her caps.

It did not matter who was coming and why is she coming? She was very happy that she was a girl, Aarushi Aarushi The ga The daughter was the only daughter of a farmer, the school and her house was about 10 kms, which she used to bicycle, the rest of her school friends did not get attached to her because she was not a rich man like her but what was her fault Well his life was set up after Intermediate,

he could not read it further because his father could only put money in a place or at marriage and in the next study There was no more reading than any matriculation in his family. This road map always kept roaming in front of his eyes that this class is his last class and after that he will be married so that he did not see dreams anymore and that day It did not make any difference to the arrival of the SDM. At 12 o’clock SDM came to their school. This is the 24-25 year old girl blue light’s Ambassador car and 4 police workers of 2 hours. After the rum,

SDM was gone, but after leaving a huge hope in the heart of Aarushi, she was now in love with her life, like her dreams now want to be free
That night, when Aarushi could not sleep, she was engaged in the same confusion in school. What she wanted to fly now. Then suddenly the poverty of the father came into the middle of her dreams and floors, she returned home and at the time of eating all mother and father Dad told him to embrace him,

he had a piece of small land that was worth 50000 rupees to put Aarushi’s wedding for him. Papa said that I can fulfill only one thing Whether for your marriage or your dream, Arushi got ready to play the bet on her dreams, after Intermediate she enrolled in her BA because her fees were the cheapest in the graduation. Papa started demanding money from someone but her destination

It was not his floor that he was and he started preparing for the biggest problem of books, then he used to resort to an old shop of old where old It was sold or purchased, these old books used to get it in half price, he bought a book and brought it after reading and selling it as a second book, and not only when there is insight into the fondness of the sweets, the sky also tilt its height. After looking at the perseverance, Ankal of that shop started giving it to the book free of charge and gave some books to buy himself and said that when the betia was created then use it with the help of Sud.

Anything that Aarushi did not want to break this belief, two years of graduation was completed and her preparation was going on well, that suddenly her mother’s health got worse, money was needed for the treatment but beforehand In the end, Dad plunged the land, and in the meantime he enrolled in the third year of graduation, the problems were not giving way to Aarushi Finally, one day, after crying to mother, she cried a lot and asked the same thing. Mother will never come our best days.

Mother gave her courage and again she says koosh, not a warrior is ever defeated or if she becomes victorious And either Veergati is received on June 23. Yes this was the same day when Aarushi had passed the preliminary examination. Now the turn was the main exam. And now the seventh heaven of Aarushi Programming were touching. It was the result of three years of hard work that even Aarushi passed the main exam. Now she was standing only one step away from her dream.

She looked back and saw only three people, uncle, father and shop had finally interviewed. And in the end result, Aarushi achieved success, as Aarushi was not sure that this is the same Aarushi, Papa was not able to stop the tears of her tears, Aarushi’s house After all, with the same tears of his forth, anyone else had to thank him, and he went straight to Ankal of the shop and stuck him on the neck and leapt himself !!
Actually, this victory was not just Aarushi’s victory. This victory included the mother’s affectionate love of Uncle,

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