Monday , 19 February 2018
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ऐसा करने से आपका आशियाना बन सकता है मंदिर

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एक बार की बात है मगध के व्यापारी को व्यापार में बहुत लाभ हुआ। इसके बाद से वह अपने अधीनस्थों से अहंकारपूर्ण व्यवहार करने लगा।

व्यापारी का अहंकार इतना प्रबल था कि उसके देखते हुए उसके परिजन भी अहंकार के वशीभूत हो गए। जब सभी के अहंकार आपस में टकराने लगे तो घर का वातावरण नर्क की तरह हो गया।

दुःखी होकर एक दिन वह व्यापारी भगवान बुद्ध के पास पहुंचा और बोला- ‘भगवन्! मुझे इस नर्क से मुक्ति दिलाइए। मैं भी भिक्षु बनना चाहता हूं।’ भगवान बुद्ध गंभीर स्वर में बोले, ‘अभी तुम्हारे भिक्षु बनने का समय नहीं आया है।’

उन्होंने कहा कि भिक्षु को पलायनवादी नहीं होना चाहिए। जैसे व्यवहार की अपेक्षा तुम दूसरों से करते हो, स्वयं भी दूसरों के प्रति वैसा ही व्यवहार करो।

ऐसा करने से तुम्हारा घर ही मंदिर बन जाएगा।’उस व्यापारी ने भगवान बुद्ध की सीख को अपनाया और घर का वातावरण स्वतः बदल गया।

In English

Once upon a time, the businessman of Magadha had a lot of profits in the business. Since then, he started acting arrogant with his subordinates.

The ego of the businessman was so strong that in view of him, his family also became envious of the ego. When everyone’s ego collides with each other, then the atmosphere of the house becomes like hell.

Sadly, one day the trader reached Lord Buddha and said, ‘God! Deliver me from this hell. I too want to become a monk. ‘ Lord Buddha said in a serious voice, ‘It is not the time to become your monk right now.’

He said that the monk should not be escapist. Just like behavior you do to others, do the same yourself to others.

By doing so your house will become a temple. ‘That merchant adopted the teachings of Lord Buddha and the atmosphere of the house changed automatically.

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