Tuesday , 19 September 2017
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भगवान विष्णु के दस अवतार

ten-incarnations-of-lord-vishnu

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राम अवतार
श्रीहरि के जयविजय नाम के दो द्वारपाल थे। वे सनकादि ब्रह्मर्षियों के शाप से घोर निशाचर कुल में पैदा हुए। उनके नाम रावण और कुम्भकर्ण थे। उनके अत्याचारों से पृथ्वी कांप उठी। वह पाप के भार को सह सकी। अन्त में वह ब्रह्मादि देवताओं के साथ भगवान की शरण में गयी। देवताओं की प्रार्थना से परब्रह्म परमात्मा ने अयोध्या के राजा दशरथ की रानी कौसल्या के गर्भ से राम के रुप में अवतार लिया। 
भगवान श्री राम ने विश्वामित्र के यज्ञ में विघ्न डालने वाले सुबाहु आदि राक्षसों को मार डाला। वे सब बडेबड़े राक्षसों की गिनती में थे। 
जनकपुर में सीता जी का स्वयंवर हो रहा था। वहां भगवान शंकर का विशाल धनुष रखा हुआ था। श्रीराम ने उस तोड़कर सीता जी को प्राप्त कर लिया। 
राजा दशरथ की आज्ञा से श्रीराम का चौदह वर्ष का वनवास हुआ। भगवान ने पिता की आज्ञा मानकर अपनी पत्नी के साथ वन की यात्रा की। उनके साथ छोटे भाई लक्ष्मण भी थे। 
वन में पहुंचकर भगवान ने रावण की बहन शूर्पणखा को कुरूप कर दिया। क्योंकि उसकी बुद्धि कामवासना के कारण अशुद्ध थी। उसके पक्षपाती खर, दूषण, त्रिशिरा आदि प्रधानप्रधान भाइयों को श्रीराम ने नष्ट कर डाला। 
शूर्पणखा की दशा देखकर रावण बहुत क्रोधित हुआ। उसने भगवान से शत्रुता ठान ली। छल से सीता जी का हरण कर लिया। श्रीराम सीता जी के वियोग में बहुत दुःखी हुए। वे अपनी प्राणप्रिया सीता जी से बिछुड़कर अपने भाई लक्ष्मण के साथ वनवन भटकने लगे। भगवान ने जटायु का दाहसंस्कार किया। फिर कबन्ध का संहार किया। सुग्रीव आदि वानरों से मित्रता करके बालि का वध किया। 
तत्पश्चात हनुमान जी सीता की खोज में लंका गए। वहां सीता से मिले। उन्होंने राक्षसों को मारा और लंका को जला दिया। लौटते समय सीता से चूड़ामणि लेकर भगवान से मिले। अन्त में श्रीराम बंदरों की सेना के साथ समुद्रतट पर जा पहुंचे। 
भगवान श्रीराम ने बंदरों आदि की सहायता से समुद्र पर पुल बांधा। विभीषण की सलाह से भगवान ने नील, सुग्रीव, हनुमान् आदि प्रमुख वीरों और वानरी सेना के साथ लंका में प्रवेश किया। दोनों ओर की सेनाओं में घमासान युद्ध हुआ। भगवान राम विजयी हुए। शरणागत विभीषण को लंका का राजा बनाया। 
उसके बाद भगवान श्रीराम ने सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटकर रामराज्य की स्थापना की। भगवान ने नर लीला करके प्राणिमात्र को प्रेम, नम्रता, सदाचार और मातापितागुरु के प्रति आदर भाव का संदेश दिया।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को हम सब नमस्कार करते हैं।

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Ram Avataar
There were two gatekeepers named Sri Hari’s Jai-Vijay. They were born in the curse of the Sunkadhi Brahmarshis, in the great nocturnal total. His name was Ravana and Kumbhakarna. The earth trembles with their atrocities. He could not bear the burden of sin. In the end, he went into Lord’s protection with Brahma gods. Parabrahma Parvatma, by the prayers of the gods, embodied the form of Ram from the womb of Rani Kausaly, the king of Ayodhya, Dasharatha.
Lord Rama killed Subhahu, who infuriated Vishwamitra’s yagna, and killed demons. All of them were in countless big monsters.
Sita ji was becoming a self-proclaimed man at Janakpur. There was a huge bow of Lord Shiva kept there. Sriram got it by breaking that.
Shriram was exiled fourteen years after the order of King Dasharath. God obeyed his father and traveled with his wife to the forest. He was also a younger brother Laxman with him.
Upon reaching the forest, God made Ravana’s sister Sholayakha unfinished. Because her intelligence was impure because of embarrassment. Sriram has destroyed his adherent khare, corruption, trishira etc. Principal-brothers.
Ravana was very angry by seeing the condition of the scion. He resolved hostility to God. Deceased Sita ji with treachery. Shriram was very sad in the separation of Sita ji They separated from their prapapriya sita ji and started wandering forests along with their brother Laxman. God sacrificed Jayaayu. Then destroyed the canvas. Sugreev, and friend of the apes, killed Balika.
Thereafter, Hanuman ji was engaged in the search for Sita. Meet Sita there. They killed monsters and burnt Lanka. While returning, meet Sita from Chaitamani and meet God. In the end, Shriram reached the sea along with the army of monkeys.
Lord Shri Ram built a bridge over the sea with the help of monkeys. With the advice of Vibhishan, God entered Lanka with Neel, Sugriva, Hanuman etc. along with the main heroes and the Vanara army. The battle between the two armies was a grueling battle. Lord Ram was victorious. Survivor Vibhishan became the King of Lanka.
After that Lord Sriram returned to Ayodhya with Sita and Laxman and established Ram-State. God gave the message of respect, love, humility, virtue and reverence for the parents and the Guru by leaning the male.
We all do Namaskar to Srimada Purshottam Lord Shriram.

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