Tuesday , 11 July 2017
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इसीलिए कहते हैं जियो दिल से

thats-why-you-say

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एक बार गुरु गोविंद साहब के कुछ शिष्य उनके पास उनके पास आए और उनसे उलाहना के स्वर में बोले, ‘गुरू जी! आपके कहने पर हम हर रोज जप करते हैं, लेकिन इससे हमें कोई लाभ नहीं होता है। इसका क्या कारण है?’

गुरु जी युवा शिष्यों की बात सुन कर कुछ कहा नहीं, ‘सिर्फ मुस्कुराए।’ कुछ देर बाद उन्होंने मदिरा से भरा एक घड़ा मंगाया और उन शिष्यों को बुला कर कहा, ‘इससे कुल्ला करके घड़ो को खाली कर दो।’ शिष्यों ने वैसा ही किया।

तब गोविंद सिहं जी ने पूछा, ‘क्या घड़े की सारी मदिरा समाप्त हो गई है। और क्या तुम लोगों को नशा चढ़ा।’ सभी शिष्य बोले, ‘जब मदिरा पेट में गई ही नहीं तो नशा कैसे चढ़ेगा।’ गुरू जी मुस्कुराए, और बोले, ‘जिस तरह गले के नीचे न उतरने से मदिरा का असर नहीं पड़ा। ठीक उसी तरह जब तक जप ह्दय से नहीं करोगे, उसमें डूब नहीं जाओगे। उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।’

Hindi to English

Once a few disciples of Guru Govind Sahib came to them and said in their voices, ‘Guruji! We chant every day when you say, but it does not benefit us. What is the reason for this?’

Guruji, after listening to the young disciples, said nothing, ‘just smile.’ After a while, he ordered a pot of wine and called those disciples and said, ‘Rinse it and empty the jar.’ The disciples did the same.

Then Govind Singh ji asked, ‘Have all the wines in the pitcher ended. And do you get intoxicants? ‘ All the disciples said, ‘When alcohol does not go into the stomach, how will you get intoxication.’ Guruji smiled and said, ‘The way the liquor did not get affected due to not coming down the throat. In the same way, unless you chant with heart, you will not drown. It will not get any benefit. ‘

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