Thursday , 13 July 2017
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गुस्से को काबू करने का अचूक उपाय

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गुस्से को काबू करने का अचूक उपाय

                                                            गुस्से को काबू करने का अचूक उपाय

बहुत पुरानी बात है। एक गांव में 12 वर्ष का लड़का अपने परिजनों के साथ रहता था। लड़का दिल का साफ था, लेकिन उसे गुस्सा बहुत आता था।

उसके परिजन काफी परेशान थे। तब एक दिन उसके पिता ने उसे ढेर सारी कीलें दीं और कहा, ‘जब भी क्रोध आए वो घर के सामने लगे पेड़ में वह कीलें ठोंक दे।’

लड़के ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए ठीक वैसे ही किया। जब उसे गुस्सा आया तो पहले दिन लड़के ने पेड़ में 30 कीलें ठोंकी। अगले कुछ हफ्तों में उसने गुस्से पर काबू कर लिया।

अब वह पेड़ में रोज इक्का-दुक्का कीलें ही ठोंकता था। उसे यह समझ में आ गया था कि पेड़ में कीलें ठोंकने के बजाय क्रोध पर नियंत्रण करना आसान था। लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब उसने पेड़ में एक भी कील नहीं ठोंकी।

जब उसने अपने पिता को यह बताया तो पिता ने उससे कहा, ‘वह सारी कीलों को पेड़ से निकाल दे।’ लड़के ने बड़ी मेहनत करके जैसे-तैसे पेड़ से सारी कीलें खींचकर निकाल दीं। जब उसने अपने पिता को काम पूरा हो जाने के बारे में बताया तो पिता बेटे का हाथ थामकर उसे पेड़ के पास लेकर गया।

पिता ने पेड़ को देखते हुए बेटे से कहा, ‘तुमने बहुत अच्छा काम किया, मेरे बेटे, लेकिन पेड़ के तने पर बने सैकडों कीलों के इन निशानों को देखो। अब यह पेड़ इतना खूबसूरत नहीं रहा। हर बार जब तुम क्रोध किया करते थे तब

इसी तरह के निशान दूसरों के मन पर बन जाते थे।

 

अगर तुम किसी पर भी गुस्सा होकर बाद में हजारों बार माफी मांग भी लो तब भी मन के घाव का निशान वहां हमेशा बना रहेगा। अपने मन-वचन-कर्म से कभी भी ऐसा काम न करो जिसके लिए तुम्हें पछताना पड़े।

Hindi to English 

It’s a very old matter. A 12-year-old boy lived with his family in a village. The boy was clear of the heart, but he was very angry.

His family was quite upset. Then one day his father gave him a lot of nails and said, ‘Whenever anger comes, he should throw the nails in the tree in front of the house.’

The boy followed his father’s command and did exactly the same. When he got angry, on the first day the boy threw 30 nails in the tree Over the next few weeks, he managed to get angry.

Now he was stunned every day in the tree. He had come to understand that it was easy to control anger in the tree instead of tackling the nails. But one day it came as he did not even have a single nail in the tree.

When he told this to his father, the father told him, ‘remove all the nails from the tree.’ The boy worked hard and pulled out all the nails from a tree like that. When he told his father about the completion of the work, the father patted his son and took him to the tree.

The father said to the son seeing the tree, ‘You did a great job, my son, but look at these traces of hundreds of nails made on the tree’s trunk. Now this tree is not so beautiful Every time you used to be angry

Similar marks were made on the minds of others.

If you become angry even after you have asked for forgiveness thousands of times even then you will still have the mark of the wounds of the mind there forever. Never do any such thing with your words and deeds, for which you have to repent.

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