Tuesday , 19 September 2017
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मन को मनाने के लिए, आनंद की बारिश में भीगिए

to-celebrate-the-mind-enjoy-the-rain-of-joy

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प्रभु यीशु एक बार झील किनारे उपदेश दे रहे थे। उपदेश के कुछ अंश इस तरह हैं, एक किसान बहुत सारे बीज लेकर खेत में बोने के लिए निकला। बीज कुछ रास्ते में गिर गए तो कुछ पक्षियों ने चुग लिए। कुछ पथरीली जमीन पर गिरे तो कुछ नम जमीन पर गिरकर अंकुरित हो गए।

चट्टान होने के कारण कुछ बीजों की जड़ें ज्यादा परिपक्व नहीं हो पाईं। इसलिए वो जल्द ही सूख गए। शेष बीज उपजाऊ जमीन पर गिए और उनकी बालियों में दाने भर आए।

इतना कहने के बाद प्रभु यीशु शांत हो गए। फिर थोड़ी देर रुककर वह बोले, प्रभु का उपदेश देने वाला गुरु बीज बोने वाले किसान की तरह है। वह भक्त के ह्दय में परमात्मा का संदेश रूपी बीज बोता है। लेकिन कुछ भक्त पथरीली धरती की तरह होते हैं। जिन्हें गुरु पर तुरंत विश्वास होता है और तुरंत नष्ट हो जाता है। क्योंकि उन्हें सांसारिक चिंताओं ने वशीभूत किया हुआ होता है।

Hindi to English

The Lord Jesus was once preaching the lake shore. Some parts of the teaching are like this, a farmer came out to sow a lot of seeds and sowed it in the farm. If the seeds fell in some way then some birds chuckled. If some rocky ground fell on the ground, some of them were germinated by falling on the ground.

Due to being a rock, the roots of some seeds have not matured much. So they soon dried up. The rest of the seeds were on the fertile ground and the grains of the ear filled with grain.

After saying this, the Lord Jesus was silenced. Then he stopped for a while, and said, The master who preaches to the Lord is like a farmer who sows seed. He sows the seeds of God’s message in the devotee’s heart. But some devotees are like rocky earth. Those who believe in the Guru immediately and are immediately destroyed. Because they have been subjugated by worldly concerns.

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