एक दिन एक किसान मेले से अपने घर लौट रहा था। उसने मेले से एक भैंस ने खरीदी थी। जब वह घने जंगल से होकर गुजर रहा था, एक डाकू उसका रास्ता रोक लिया। उसके हाथ में एक मोटा-सा डंडा था।
वह बोला, “तुम्हारे पास जो कुछ भी है, वह सब मुझे दे दो।” । किसान डर गया। उसने अपने सारे पैसे डाकू को दे दिए। तब डाकू बोला, “अब मुझे तुम्हारी भैंस भी चाहिए।” यह सुनकर किसान ने भैंस की रस्सी भी भी डाकू के हाथ में दे दी।
फिर किसान बोला, “मेरे पास जो कुछ भी था, मैंने सब तुम्हें दे दिया। कृपा करके आप मुझे अपना डंडा दे दीजिए।” डाकू ने पूछा, ” लेकिन तुम्हें इसकी क्या आवश्यकता है?” वह बोला, “मैं यह डंडा अपनी पत्नी को दूंगा ।
यह डंडा देखकर वह बड़ी खुश होगी कि मैं मेले से उसके लिए कुछ तो लाया हूँ।” डाकू ने डंडा किसान को दे दिया। किसान ने बिना वक्त गंवाए डाकू को जोर-जोर से मारना शुरू कर दिया।
डाकू पैसे और भैंस छोड़कर वहाँ से भाग खड़ा हुआ। इस तरह से बुद्धिमान किसान ने अपना सामान डाकू से बचा लिया।
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