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रामायण की कहानी: रामसेतु में गिलहरी का योगदान!!

माता सीता का हरण होने के बाद, भगवान राम को लंका तक पहुंचने के लिए उनकी वानर सेना जंगल को लंका से जोड़ने के लिए समुद्र के ऊपर पुल बनाने के काम में लग जाती है। पुल बनाने के लिए पत्थर पर भगवान श्रीराम का नाम लिखकर पूरी सेना समुद्र में पत्थर डालती है। भगवान राम का नाम लिखे जाने …

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रामायण की कहानी: हनुमान जी का जन्म!!

रामभक्त हनुमान को कई नामों से जाना जाता है, जैसे मारुति नंदन, पवनपुत्र व संकटमोचन आदि। माना जाता है कि वह भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार थे और उनके जन्म का उल्लेख कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। इस कहानी में हम हनुमान जी के जन्म से जुड़ी ऐसी ही एक प्रचलित कथा बता रहे हैं। हनुमान जी के …

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परीक्षित के जन्म की कहानी!!

परीक्षित के जन्म की कथा महाभारत के युद्ध के समय की है। जब द्रौपदी को इस बात की जानकारी मिली कि अश्वत्थामा ने उसके पांचों बेटों की हत्या कर दी है तो उसने अनशन करने की ठान ली। द्रौपदी ने प्रण लिया कि वह अपना अनशन तभी तोड़ेगी जब तक कि अश्वत्थामा के सिर पर लगी मणि उसे नहीं मिल …

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कर्ण और दुर्योधन की मित्रता!!

एक बार की बात है, गुरु द्रोणाचार्य ने राजकुमारों के बीच प्रतियोगिता रखी, जिसमें उन्हें कई करतब दिखाने थे। इस प्रतियोगिता में भाग लेने कौरवों और पांडवों के अलावा दूर-दूर के राज्यों से भी राजकुमार आए थे। इस प्रतियोगिता में अर्जुन ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन तभी वहां कर्ण आ गया। कर्ण ने वो सारे करतब कर दिखाए, जो …

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पांडवों की जन्म कथा!!

पांडव हस्तिनापुर के राजा पांडु और उनकी दो पत्नियों कुंती व माद्री के पांच शक्तिशाली और कुशल पुत्र थे। महाभारत में युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, और सहदेव – ये पांच पांडव सबसे अधिक सराहना के पात्र रहे हैं। इनके जन्म की कहानी न सिर्फ दिलचस्प है, बल्कि हैरान कर देने वाली भी है। एक बार राजा पांडु अपनी पत्नियों के …

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परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया!!

कर्ण द्वापर युग के महान योद्धा में से एक थे, लेकिन उनको मिला श्राप उनकी मौत का कारण बन गया। कर्ण को उनके जीवन काल में दो श्राप मिले थे। उन्हें पहला श्राप उनके गुरु भगवान परशुराम ने दिया था, जबकि दूसरा श्राप एक ब्राह्मण ने दिया था। कर्ण को बचपन से ही धनुर्धर बनने की चाहता थी, लेकिन सूत …

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महाभारत की कहानी: भक्त ध्रुव की कथा!!

एक बार की बात है, राजा उत्तानपाद थे और उनकी दो रानियां थीं। एक रानी का नाम सुनीति और दूसरी रानी का नाम सुरुचि था। सुनीति बड़ी रानी और सुरुचि छोटी रानी थी। रानी सुनीति के पुत्र का नाम ध्रुव और रानी सुरुचि के पुत्र का नाम उत्तम था। राजा उत्तानपाद का रूझान छोटी रानी सुरुचि के तरफ ज्यादा था, …

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अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियों और उनसे होने वाले चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बारे में सभी जानते हैं, लेकिन भगवान राम की बड़ी बहन के बारे में हर किसी को नहीं पता। वाल्मीकि रामायण में भी राम की बहन शांता के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन दक्षिण पुराण में भगवान राम की बहन …

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अकबर-बीरबल की कहानी: अंधे या देखने वाले!!

एक बार की बात है। अकबर और बीरबल किसी बात पर चर्चा कर रहे थे। तभी एक क्षण ऐसा आया, जब राजा अकबर ने कहा, ‘बीरबल दुनिया में हर 100 आदमी के पीछे एक अंधा व्यक्ति होता है।’ राजा की यह बात सुनकर बीरबल ने उनकी इस बात पर असहमति जताते हुए कहा, ‘महाराज मेरे हिसाब से आपका आकलन कुछ …

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सत्य की विजय!!

शहर के मुख्य चौराहे पर एक लड़का तरबूज और दूसरा ककड़ी की दुकान लगाकर बैठा था। उधर से गुजरने वाला एक व्यक्ति रुककर तरबूज की दुकान पर गया। एक तरबूज उठाकर वहां मौजूद लड़के से उसने पूछा, “यह तरबूज कैसा है?” लड़के ने उत्तर दिया, “यह तो अंदर से सड़ा है, श्रीमान। आप दूसरा ले लीजिए।” व्यक्ति ने कहा कि …

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