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Sarita Gauttam

कचरा

औद्योगिकीकरण समाप्त करें अन्यथा वही आपको समाप्त कर देगा । संपूर्ण मानवजाति को ही नष्ट कर देगा; क्योंकि विश्व के विशाल राक्षसी कारखानों से जितना प्रचंड उत्पादन होता है, उतना ही विषैला घातक कचरा भी निर्माण होता है ।’ – गुरुदेव डॉ. काटेस्वामीजी पर्यावरण के कचरे के कारण रीन एवं सीसा के धातुकणों का भूमिगत एवं भूमि के ऊपर के …

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सरखेल कान्‍होजी आंग्रे : मराठा नौदल प्रमुख

मराठा साम्राज्‍य में सरखेल कान्‍होजी आंग्रे ‘मराठा नौसेना’ के प्रमुख थे । कान्‍होजी आंग्रे लगभग २५ वर्षों तक भारत के कोंकण का सागरी तट को स्‍वराज्‍य में सुरक्षित रखने में सफल हुए थे । सागर के सम्राट कान्‍होजी आंग्रे को नौसेनाधिपति (सरखेल) आंग्रे भी कहा जाता है । १८ वीं शताब्‍दी में वह मराठा साम्राज्‍य की नौसेना के सेनापति थे …

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राधा का चरणामृत

आज हम बालकृष्ण और राधा का एक प्रसंग सुनेंगे । एक बार गोकुल में बालकृष्ण बीमार हो गए थे । कोई भी वैद्य, औषधि, जडी-बूटी उन्हें ठीक नहीं कर पा रही थी । गोपियों को यह बात पता चली । गोपियां कृष्ण से मिलने आई । कृष्ण की ऐसी स्थिति देखकर सभी गोपियों की आंखों में आंसू आ गए । …

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अन्यों का विचार करने का महत्व !

बहुत समय पहले की बात है । एक विख्यात गुरुदेव का गुरुकुल हुआ करता था । उस गुरुकुल में बडे-बडे राजा-महाराजाओं के पुत्रों से लेकर साधारण परिवार के पुत्र भी शिक्षा लेते थे । अनेक वर्षोंसे शिक्षा प्राप्त कर रहे कुछ शिष्यों की शिक्षा पूर्ण हो चुकी थी । अब वे सभी बडे उत्साह के साथ अपने अपने घर लौटने …

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गुरुभक्‍त संदीपक !

गोदावरी नदी के तट पर महात्‍मा वेदधर्मजी का आश्रम था । उनके आश्रम में अलग-अलग स्‍थानों से वेद अध्‍ययन करने के लिए विद्यार्थी आते थे । उनके शिष्‍यों में संदीपक नाम का अत्‍यंत बुद्धिमान शिष्‍य था । वह गुरुभक्‍त भी था । वेदों का अभ्‍यास पूर्ण होने पर उन्‍होंने अपने सभी शिष्‍यों को बुलाया और कहा कि, ‘‘मेरे प्रिय शिष्‍यों, …

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नरकासुर वध

आज की यह कहानी दीपावली से संबधित है । भागवत पुराण में बताए अनुसार, भगवान श्रीविष्णु ने वराह अवतार धारण कर भूमि देवता को समुद्र से निकाला था । इसके बाद भूमि देवता ने एक पुत्र को जन्म दिया । उसका नाम भौम था । पिता एक परमदेव और माता पुण्यात्मा होने पर भी पर भौम क्रूर था, इसलिए उसका …

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देवी लक्ष्मी कहां विराजमान रहती है

एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर ने पितामह भीष्म से पूछा, ‘‘पितामह ! क्या करने से मनुष्य के दुःखों का नाश होता है ? कोई मनुष्य दुःखी होनेवाला है अथवा सुखी होनेवाला है, यह कैसे समझ सकते हैं ? किसका भविष्य उज्ज्वल होगा और किसका पतन होगा यह कैसे पता चल सकता है ? पितामह भिष्म ने कहां, ‘‘पुत्र इस विषय में …

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प्रभु श्रीराम की बहन शांता और ऋष्यश्रृंग

आप सभी को ज्ञात होगा कि श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न राजा दशरथ के पुत्र थे । इनके साथ ही राजा दशरथ और रानी कौशल्या की शांता नाम की एक कन्या भी थी । शांता उनकी पहली संतान थी । अर्थात वह प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न इनकी बहन थी । शांति और सद्भाव का प्रतीक थी । रानी …

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तपस्या का फल !

बहुत वर्ष पूर्व ऋषि-मुनी भगवान को पाने के लिए कठोर तपस्या करते थे । यह तपस्या कैसी रहती थी ? एक पांव पर खडे होकर नमस्कार की मुद्रा में भगवान का नामजप करना, पानी में नमस्कार की मुद्रा में खडे रहकर अखंड भगवान का नामजप करना, हिमालय जैसे पर्वत  पर जाकर अत्यंत ठंड में एक ही जगह अनेक वर्षाें तक …

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भगवान शिवजी का गृहपति अवतार !

भगवान विष्‍णु के अनेक अवतार हुए हैं, वैसेही भगवान शिवजी के भी अवतार हुए है । भगवान शिवजी के अनेक अवतारों में से सातवे अवतार है गृहपति । आज हम उनके इस अवतार की कथा सुनेंगे । नर्मदा नदी के तट पर धर्मपुर नाम का एक नगर था । वहां विश्‍वानर नाम के एक ऋषि और उनकी पत्नी शुचिष्‍मती रहती …

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