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vikkykyt@yahoo.com

मन से हारें नहीं कन्फ्यूशियस कहते हैं इस तरह रखें संयम

एक बार एक साधक ने कन्फ्यूशियस से पूछा, मैं मन पर संयम कैसे रखूं? कन्फ्यूशियस ने उस व्यक्ति से पूछा, क्या तुम कानों से सुनते हो? साधक ने कहा, हां, मैं कानों से ही सुनता हूं। तब कन्फ्यूशियस ने कहा, मैं नहीं मान सकता तुम मन से भी सुनते हो और उसे सुनकर अशांत हो जाते हो। इसलिए आज से …

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दुर्जन से नहीं उनके दुर्गणों से घृणा करो

संत राबिया किसी धर्मग्रंथ का अध्ययन कर रही थीं। अचानक उनकी निगाह एक शब्द पर आकर रुक गई। वह शब्द था, ‘दुर्जनों से घृणा करो?’ वे कुछ देर तक उसी को दोहराती रहीं फिर उन्होंने उस पंक्ति को काट दिया। कुछ समय बाद दो संत उनके घर आए सामने रखे ग्रंथ पर उनकी निगाह पड़ी तो वे उस ग्रंथ को …

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एक रूपये की कीमत

                                                                       एक रूपये की कीमत बहुत समय पहले की बात है, सुब्रोतो लगभग 20 साल का एक लड़का था और कलकत्ता की एक कॉलोनी में रहता …

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जहां धर्म वहां विजय

दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं धर्म के बारे में। धर्म ही हमें जीना सिखाता है, हमें सही मार्ग पर चलना सिखाता है। या फिर कह सकते हैं कि धर्म इंसान के लिए ही बना है। संसार में बहुत सारे धर्म हैं। सभी धर्म हमें इंसानियत सिखाते हैं। धर्म कोई भी हो हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। …

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पढ़िए नयनों की भाषा

पढ़िए नयनों की भाषा

  एक युवक किसी सामान्य नौकरी की आकांक्षा लिए सर श्रीराम के पास पहुंचा। उन्होंनें उस युवक की आंखों की तरफ देखा और कुछ क्षण बाद बोले, यद्यपि तुम्हारी प्रतिभा और योग्यता उस पद से अधिक है, तथापि मैं तुम्हें अपनी मिल के एक विभाग का मैनेजर नियुक्त करता हूं। आनंद से विभोर उस युवक की आंखें खुशी के आंसु …

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हतोत्साहित मन होता है पराजय की पहली सीढ़ी

हतोत्साहित मन होता है पराजय की पहली सीढ़ी

महाभारत का युद्ध चल रहा था। एक ओर अर्जुन थे, जिनके सारथी थे ‘श्री कृष्ण’। तो दूसरी ओर कर्ण थे और उनका सारथी ‘शल्य’। भगवान श्री कृष्ण ने कर्ण के सारथी से कहा- ‘तुम हमारे विरुद्ध जरूर लड़ना पर मेरी एक बात जरूर मानना।’ जब कर्ण प्रहार करे तब कहना कि, ‘यह भी कोई प्रहार होता है, तुम प्रहार करना …

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हमारे आसपास हैं ये तीन डाकू

हमारे आसपास हैं ये तीन डाकू

बहुत पुरानी बात है। एक समय जंगल से एक यात्री अपनी मंजिल की ओर जा रहा था। अचानक उसे तीन डाकुओं ने घेर लिया और उसका सारा धन लूट लिया। उस व्यक्ति को लूट लेने के बाद एक डाकू बोला,’अब इस आदमी को जिंदा छोड़ देने से क्या लाभ?’यह कहकर उसने म्यान से तलवार खींच ली।तब दूसरे डाकू ने उसे …

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परिश्रम में मिलाइए अभ्यास का रंग

परिश्रम में मिलाइए अभ्यास का रंग

युनान के डिमास्थनीज बोलने में न केवल तुतलाते थे, बल्कि हकलाते भी थे। एक दिन वह अपने शहर की सभा में एक प्रसिद्ध वक्ता का भाषण सुनकर वह बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने मन ही मन अच्छा वक्ता बनने का संकल्प लिया। वह जानते थे कि उनकी तुतलाहट और हकलाहट करियर के रास्ते में परेशानी खड़ी करेंगे। लेकिन उन्हें यह …

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मुश्किल है इस जहां में इनको तलाशना

मुश्किल है इस जहां में इनको तलाशना

एक दार्शनिक थे। वह चिंतन में लीन रहते थे। बोलते थे, तो बड़ी गहरी बात कहते थे। इससे लोग उनका बहुत मान-सम्मान किया करते थे। लेकिन कभी-कभी उनकी बातें अजीब-सी होती थीं, और वो स्वयं अपनी ही बातों पर हंसी नहीं रोक पाते थे। एक दिन लोगों ने देखा कि दार्शनिक महोदय हाथ में जलती लालटेन लए कहीं जा रहे …

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एक तमाचा, वो जिंदगी भर नहीं भुला सका

story of two frends

एक बार दो दोस्त रेगिस्तान के रास्ते अपने घर जा रहे थे। रास्ते में दोनों में कुछ कहा-सुनी हो गई। बात इतनी बढ़ गई की उनमे से एक मित्र ने दूसरे के गाल पर जोर से तमाचा मार दिया। जिस मित्र को तमाचा पड़ा उसे दुःख तो बहुत हुआ किंतु उसने कुछ नहीं कहा। वह झुका और उसने वहां रेत …

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