सिव सम को रघुपति ब्रतधारी । बिनु अघ तजी सती असि नारी ।। भगवान शिव और माता सती देवी की असीम महिमा बड़े ही सुंदर ढंग से प्रतिपादित की है । भगवान शिव के लिए है क्योंकि संसार में सब धर्मों का सार, सब तत्त्वों का निचोड़ भगवत्प्रेम ही निश्चय किया गया है । भगवान परब्रह्म में दृढ़ निष्ठा …
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चैतन्य महाप्रभु, वाल्मीकि और शंकराचार्य के आविर्भाव की कथा
देवगुरु बृहस्पति ने कहा – देवेंद्र ! प्राचीन काल में किसी समय वेदपारंगत विष्णुशर्मा नाम के एक ब्राह्मण थे । वे प्रसन्नचित्त से सर्वदेवमय विष्णु की पूजा करते थे, इसलिए देवतालोक भी उनकी प्रतिष्ठा करते थे, इसलिए देवतालोग भी उनकी प्रतिष्ठा करते थे । वे भिक्षावृत्ति से जीवननिर्वाह करते थे, उनकी स्त्री थी किंतु कोई पुत्र न था । …
Read More »Yogi BHAJAN
Accueil >> Le Kundalini Yoga >> Yogi BHAJAN >> Où pratiquer le Kundalini Yoga ? >> Stages et évènements >> Le Festival de Yoga >> Exercices et méditations >> Livres et manuels >> Devenir professeur de KY >> En savoir plus sur la FFKY >> Structure Internationale (3HO) >> Fédération Internationale (IKYTA) >> “The Aquarian Teacher” en français >> Numérologie …
Read More »दरिद्रा कहां – कहां रहती है ?
समुद्र मंथन के समय हलाहल के निकलने के पश्चात् दरिद्रा की, तत्पश्चात् लक्ष्मी जी की उत्पत्ति हुई । इसलिए दरिद्रा को ज्येष्ठ भी कहते हैं । ज्येष्ठा का विवाह दु:सह ब्राह्मण के साथ हुआ । विवाह के बाद दु:सह मुनि अपनी पत्नी के साथ विचरण करने लगे । जिस देश में भगवान का उद्घोष होता, होम होता, वेदपाठ होता, …
Read More »चक्रपाणि
इस अपार पयोधि की अनन्त उत्ताल तरंगों में अनिलानल में, नक्षत्रपूर्ण नीलाकाश में, मधुर ज्योत्स्नामय सुधाकर में, उद्दीप्त प्रखर ज्योतिमान सूर्य में चक्रपाणि का दर्शन हो रहा है । अनन्त सौंदर्य के अधिष्ठातृ देव भगवान कमललोचन शांतरूपेण विराजमान हैं । भू:, भुव:, स्व: आदि सप्तलोक महाप्रभु की एक अंगुली पर भ्रमित चक्रपर घुम रहे हैं । मृत्युलोकवासी अपनी भाषा …
Read More »श्रीदुर्गासप्तशती के आदिचरित्र का माहात्म्य
ऋषियों ने पूछा – सूतजी महाराज ! अब आप हमलोगों को यह बतलाने की कृपा करें कि किस स्तोत्र के पाठ करने से वेदों के पाठ करने का फल प्राप्त होता है और पाप विनष्ट होते हैं । सूतजी बोले – ऋषियों ! इस विषय में आप एक कथा सुनें । राजा विक्रमादित्य के राज्य में एक ब्राह्मण रहता …
Read More »LE KUNDALINI YOGA
LE KUNDALINI YOGA > Accueil >> Le Kundalini Yoga >> Yogi BHAJAN >> Où pratiquer le Kundalini Yoga ? >> Stages et évènements >> Le Festival de Yoga >> Exercices et méditations >> Livres et manuels >> Devenir professeur de KY >> En savoir plus sur la FFKY >> Structure Internationale (3HO) >> Fédération Internationale (IKYTA) >> “The Aquarian …
Read More »Kundalinî Yoga
Le Kundalinî-Yoga tire son nom du terme Kundalinî, qui, selon cette doctrine, désigne une énergie primordiale qui serait présente en chaque être humain et qui évoluerait le long d’un canal principal (Sushumnâ) situé dans la colonne vertébrale, au centre de la moelle épinière, depuis le sacrum jusqu’au sommet de la tête. Le Kundalinî-Yoga vise à l’éveil de la conscience du …
Read More »रक्षक प्रभु
इन्द्र से वरदान में प्राप्त एक अमोघ शक्ति कर्ण के पास थी । इन्द्र का कहा हुआ था कि इस शक्ति को तू प्राणसंकट में पड़कर एक बार जिस पर भी छोड़ेगा, उसी की मृत्यु हो जाएंगी, परंतु एक बार से अधिक इसका प्रयोग नहीं हो सकेगा । कर्ण ने वह शक्ति अर्जुन को मारने के लिए रख छोड़ी …
Read More »शिवोपासना का अद्भुत फल
प्राचीन काल में एक राजा थे, जिनका नाम था इंद्रद्युम्न । वे बड़े दानी, धर्मज्ञ और सामर्थ्यशाली थे । धनार्थियों को वे सहस्त्र स्वर्णमुद्राओं से कम दान नहीं देते थे । उनके राज्य में सभी एकादशी के दिन उपवास करते थे । गंगा की बालुका, वर्षा की धारा और आकाश के तारे कदाचित गिने जा सकते हैं, पर इंद्रद्युम्न पुण्यों …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…