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पत्थर मारने पर फल मिलते हैं तो धन क्यों नहीं

patthar marne par fal milte hai toh dhan kyu nhi

एक बार महाराज रणजीत सिंह कहीं जा रहे थे। सामने से एक ईंट आकर उन्हें लगी। सिपाहियों नें चारों ओर नजर दौड़ाई, तो एक बुढ़िया दिखाई दी। उसे गिरफ्तार करके महाराज के सामने हाजिर किया गया। बुढ़िया महाराज को देखते ही डर गई। वह बोली, सरकार, मेरा बच्चा कल से भूखा था। घर में खाने को कुछ न था। इसलिए …

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यकीन कीजिए! एक चाकू से भी ले सकते हैं सीख

यकीन कीजिए! एक चाकू से भी ले सकते हैं सीख

जब स्वामी विवेकानंद शिकागो की धर्मसभा में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। तब वह यात्रा पर जाने से पूर्व वह स्वामी रामकृष्ण परमहंस की धर्मपत्नी गुरु मां शारदा से आशीर्वाद लेने गए। चरण स्पर्श के पश्चात गुरु मां से वह बोले, ‘मुझे भारतीय संस्कृति पर बोलने के लिए अमेरिका से आमंत्रण मिला है। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।’ मां …

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विवेकानंद कहते थे – बंदरों की तरह होती हैं कठिनाइयां

monkeys

घटना तब की है जब स्वामी विवेकानंद वृंदावन में थे। सड़क पर चल रहे थे। कुछ लाल मुंह के बंदर उनके पीछे पड़ गए। स्वामीजी भागने लगे। बंदर भी उन पर तेजी से आक्रमण करने लगे। तभी एक समझदार व्यक्ति ने कहा, भागो मत। इनके सामने डट कर खड़े रह जाओ। मुकाबला करो। स्वामीजी ने वैसा ही किया और बंदर …

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रोते-रोते हंसना कुछ इनसे सीखो

Rote rote hasna kuch in se sikho

  वह स्कूल के मेधावी छात्र माने जाते थे। एक बार स्कूल में कहानी प्रतियोगिता आयोजित की गई। कहानी लिखने के लिए महीने भर का समय दिया गया। उस छात्र को ही नहीं बल्कि उसके अध्यापकों को भी पूरा भरोसा था कि पुरस्कार उसी को मिलेगा। लेकिन उस छात्र को केवल एक कहानी लिखने के लिए महीने भर का समय …

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मुमताज़ महल का इतिहास

मुमताज़ महल का इतिहास

मुमताज़ महल का इतिहास / Mumtaz Mahal History in Hindi/English मुमताज़ महल मुग़ल महारानी और मुग़ल शासक शाहजहाँ की मुख्य पत्नी भी थी. मुमताज की ही याद में उनके पति शाहजहाँ ने आगरा में ताजमहल का निर्माण किया था. मुमताज़ महल / Mumtaz Mahal का  जन्मअरजुमंद बानू बेगम के नाम से आगरा के एक पर्शियन परीवार में अब्दुल हसन असफ …

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जानिए कबीरदास की बेबाक सोच

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एक बार रामानंद जी ने कबीरदास से कहा, श्राद्ध के दिन चल रहे हैं। पितरों का तर्पण करना है। इसलिए पितरों के लिए खीर बनाने का प्रबंध करो।’ कबीरदास जी खीर के लिए दूध लेने चल दिए। उस समय कबीरदास जी की उम्र महज 9 वर्ष थी। कबीर दास ने बाजार से दूध लिया और थोड़े आगे चले ही थे …

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आचार्य बहुश्रुत के शिष्यों की कांटों भरी अंतिम परीक्षा

The final examination of the thorns of Acharya Purshuva's disciples

एक बार गुरुकुल में तीन शिष्यों की विदाई का अवसर आया तो आचार्य बहुश्रुत ने कहा की सुबह मेरी कुटिया में आना। तुम्हारी अंतिम परीक्षा होगी। आचार्य बहुश्रुत ने रात्रि में कुटिया के मार्ग पर कांटे बिखेर दिए। सुबह तीनों शिष्य अपने-अपने घर से गुरु के निवास की ओर चल पड़े। मार्ग पर कांटे थे। लेकिन शिष्य भी कमजोर नहीं …

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आचरण सुंदर तो तन और मन भी सुंदर

behaviour-beautiful-to-tan-and-mind-too-su

बात उन दिनों की है जब भगवान श्रीराम अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान चित्रकूट में थे। भगवान राम एवं माता सीता कुटिया के बाहर बैठे हुए थे। लक्ष्मणजी उनके चरणों में बैठे थे। तभी श्रीराम ने कहा कि लक्ष्मण यहां आओ मेरे और सीता के बीच एक झगड़ा हो गया है। इसलिए तुम न्याय करो। लक्ष्मण जी मान …

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क्‍या था उन गायब होती गायों का रहस्‍य!

what-was-the-secret-of-those-disappearing-cows

दो संन्यासी युवक यात्रा करते-करते किसी गांव में पहुंचे। वहां लोगों से पूछा हमें एक रात्रि यहां रहना है किसी पवित्र परिवार का घर दिखाओ। लोगों ने बताया कि वहां एक चाचा का घर है। साधु-महात्माओं का आदर सत्कार करते हैं। अखिल ब्रह्माण्डमां एकतुं श्रीहरि’ का पाठ उनका पक्का हो गया है। वहां आपको ठीक रहेगा। उन्होंने उन सज्जन चाचा …

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कहीं भटकने की जरूरत नहीं क्योंकि यह है सफलता का मंत्र

there-is-no-need-to-wander-somewhere-because-it-is-the-mantra-of-success

प्राचीन काल में उत्तरी चीन में एक बुजुर्ग रहता था। जो उत्तरी पहाड़ी का महामूर्ख कहलाता था। क्योंकि उसके घर के सामने दो बड़े पहाड़ थे। आने-जाने में बड़ी ही परेशानी होती थी। तो उस वृद्ध व्यक्ति ने अपने दोनों बेटों के साथ पहाड़ को काटना आरंभ कर दिया। उनके इस काम को देखकर वहां रहने वाले सभी लोगों ने …

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