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सुनीथा की कथा (अभिभावक उपेक्षा न करें)

krshnadarshan - bhagavaan shiv ke avataar

अभिभावकों को चाहिए कि वे अपनी संतान की संभाल में तनिक भी उपेक्षा न आने दें । इनके द्वारा की गयी थोड़ी भी उपेक्षा संतान के लिए घातक बन जाती है । सुनीथा मृत्यु देवता की कन्या थी । बचपन से ही वह देखती आ रही थी कि उसके पिता धार्मिकों को सम्मान देते हैं और पापियों को दण्ड । …

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श्रीहरि भक्ति सुगम और सुखदायी है

Abhimanu Mahabharat Mahakavye

भोजन करिअ तृपिति हित लागी । जिमि सो असन पचवै जठरागी ।। असि हरि भगति सुगम सुखदाई । को अस मूढ़ न जाहि सोहाई ।। भाव यह कि भगवद्भक्ति मुंह में कौर ग्रहण करने के समान ही सुगम है – ‘भोजन करिअ तृपिति हित लागी ।’ वैसे ही वह सुखदायी भी है – ‘जिमि सो असन पचवै जठरागी ।।’ जिस …

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शिव जी का किरात वेष में प्रकट होना

Aatma Santosh Ka Gunn Story

इंद्र के उपदेश तथा व्यास जी की आज्ञा से अर्जुन भगवान महेश्वर की आराधना करने लगे । उनकी उपासना से ऐसा उत्कृष्ट तेज प्रकट हुआ, जिससे देवगण विस्मिल हो गये । वे शिव जी के पास गये और बोले – ‘प्रभो ! एक मनुष्य आपकी तपस्या में निरत है । वह जो कुछ चाहता है, उसे आप प्रदान करें ।’ …

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सीता शुकी संवाद

Mata Sita Ke svemver Ki katha

एक दिन परम सुंदरी सीता जी सखियों के साथ उद्यान में खेल रही थीं । वहां उन्हें शुक पक्षी का एक जोड़ा दिखायी दिया जो बड़ा मनोरम था । वे दोनों पक्षी एक डाली पर बैठकर इस प्रकार बोल रहे थे – ‘पृथ्वी पर श्रीराम नाम से प्रसिद्ध एक बड़े सुंदर राजा होंगे । उनकी महारानी सीता के नाम से …

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श्रीकैकेयी और सुमित्रा माता के चरित्र से शिक्षा

shree kaikeyee aur sumitra maata ke charitr se shiksha

भरत माता श्री कैकेयी जी के चरित्रों से प्रकट और गुप्त – दो प्रकार की शिक्षाएं लौकिक तथा पारलौकिक रूपों में मिलती हैं । प्रथम प्रकटरूप में लोकशिक्षा को स्पष्ट किया गया है – जैसे कोई कैसा भी भला ऎघर क्यों न हो, घरवालों में परस्पर कैसी भी प्रीति क्यों न हो, घर की स्त्रियां कैसी भी सुयोग्य और सुबोध …

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भव – भगवान शिव के अवतार (the incarnation of Lord Shiva)

Janiye Kya Hai Manes Pooja

भगवान रुद्र के स्वरूप का नाम भव है । इसी रूप में वे संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं तथा जगद्गुरु के रूप में वेदांत और योग का उपदेश देकर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं । भगवान रुद्र का यह स्वरूप जगद्गुरु के रूप में वंदनीय है । भव – रुद्र की कृपा के बिना विद्या, योग, ज्ञान, भक्ति …

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सत्कर्म में श्रमदान का अद्भुत फल

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बृहत् कल्प की बात है । उस समय धर्ममूर्ति नामक एक प्रभावशाली राजा थे । उनमें कुछ अलौकिक शक्तियां थीं । वे इच्छा के अनुसार रूप बदल सकते थे । उनकी देह से तेज निकलता रहता था । दिन में चलते तो सूर्य की प्रभा मलिन हो जाती थी और रात में चलते तो चांदनी फीकी पड़ जाती थी । …

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भक्तों की तीन श्रेणियां (Three categories of devotees)

chit chor meromakhan khay gayo re bhajan

भक्तों की तीन श्रेणियां होती हैं । एक तो वे होते हैं जो किसी फल की कामना से भगवान को भजते हैं । भगवान कहते हैं – उनकी भक्ति वास्तविक भक्ति नहीं, वह तो एक प्रकार की स्वार्थपरायणता है । दूसरी श्रेणी के भक्त वे हैं जो बिना किसी फल की इच्छा के अपना सर्वस्व उन्हें समर्पित कर सदा उनकी …

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शिव जी का हनुमान के रूप में अवतार

Chilkur Balaji Mandir

एक समय की बात है, भगवान शिव ने भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दे दिया कि तुम जिसके सिर पर अपना हाथ रख दोगे, वह जल कर भस्म हो जायेगा । भस्मासुर ने पार्वती के सौंदर्य पर मोहित होकर उन्हें प्राप्त करने के लिए भगवान शिव को भस्म करने का उपक्रम किया । उस समय भगवान विष्णु …

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नल दमयंती के पूर्व जन्म का वृतांत

Bhagwan Shiv Ke liye

पूर्वकाल में आबू पर्वत के समीप एक आहुक नामक भील रहता था । उसकी पत्नी का नाम आहुजा था । वह बड़ी पतिव्रता तथा धर्मशीला थी । वे दंपत्ति बड़े शिवभक्त एवं अतिथि सेवक थे । एक बार भगवान शंकर ने इनकी परीक्षा लेने का विचार किया । वे एक यतिका रूप धारण करके संध्या समय आहुक के दरवाजे पर …

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