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भगवान शिव का ये मंदिर 5वीं शताब्दी का है, खुदाई में ऐसे और मंदिर मिलने की संभावना है

cheen liya mera bhola sa maan Bhajan

कहते हैं कि शिव ही सत्य और शक्ति हैं. बिना इनके दुनिया की कल्पना नहीं की जा सकती है. वैसे तो भगवान शिव की पूजा सदियों से होती आ रही है और वर्तमान में भी हो रही है. भगवान शिव अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं, उनके सारे कष्टों का निवारण भी करते हैं. जो लोग भगवान शिव के अस्तित्व …

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लुप्त होने की कगार पर है वैदिक शिक्षा के गढ़ ‘मंथनी गांव’ का गोमतेश्वर मंदिर

gomatesvari

मंथनी के गोमतेश्वर मंदिर की टूटी-फूटी दीवारों और लताओं से ढकी मूर्तियों को देख कर आपको लगेगा जैसे आप हजारों साल पुराने किसी बीहड़ में आ गये हैं. ये जगह पहले वैदिक शिक्षा का गढ़ हुआ करती थी. ये गांव वेद शास्त्रियों से भरा हुआ था. माना जाता है कि मंथनी हजारों ब्राह्मणों का घर हुआ करता था. बुजुर्गों का …

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परंपरा का निर्माण

bharam-devta

जीवन के साथ आयुर्वेद का गहरा संबंध होने के कारण पितामह ब्रह्मा ने आयुर्वेद के पठन – पाठन की परंपरा स्थापित की । ब्रह्मा जी ने इस चिकित्सा – शास्त्र को अपने मानसपुत्र दक्ष को और दक्ष ने अश्विनीकुमारों को तथा अश्विनीकुमारों ने देवराज इंद्र को पढ़ाया । इस तरह यह परंपरा आजतक चलती चली आ रही है । यद्यपि …

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चिकित्सकों के चिकित्सक भगवान शिव

Bhagavaan shiv ke lie maataa paarvatee ne kiyaa thaa ghor tap

भगवान रुद्र ने ओषधियों का निर्माण करके जगत का इतना कल्याण किया है कि वेद ने भी भगवान शंकर सम्पूर्ण शरीर को ही भेषज मान लिया है । कहा है कि – या ते रुद्र शिवा तनू शिवा विश्वस्य भेषजी । शिवा रुद्रस्य भेषजी तया नो मृड जीवसे ।। सचमुच आयुर्वेद भगवान शिव के रूप में ही अभिव्यक्त हुआ था, …

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गीता और वेद

Adi Guru Shri Krishan

गीता वेदों को बहुत आदर देती है । भगवान अपने को समस्त वेदों के द्वारा जाननेयोग्य, वेदान्तका रचनेवाला और वेदों को जाननेवाला कहकर उनका महत्तव बहुत बढ़ा देते हैं । संसार रूपी अश्वत्थवृक्षका वर्णन करते हुए भगवान कहते हैं कि ‘मूलसहित उस वृक्षको तत्व से जाननेवाला ही वास्तव में वेद के तत्व को जाननेवाला है’ । इससे भगवान ने यह …

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सबसे बड़ा दान क्या है ?

sabase bada daan kya hai ?

यज्ञ में युधिष्ठिर से प्रश्न किया गया ‘श्रेष्ठ दान क्या है’ ? इस पर युधिष्ठिर ने उत्तर दिया, ‘जो सत्पात्र को दिया जाएं । जो प्राप्त दान को श्रेष्ठ कार्य में लगा सके, उसी सत्पात्र को दिया दान श्रेष्ठ होता है । वहीं पुण्यफल देने में समर्थ है ।’ कर्ण ने अपने कवज का शिवि ने अपने मांस का, जीमूतवाहन …

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दक्षिणा क्यों है महत्त्वपूर्ण

Agar shyam sunder ka shera na hota

दक्षिणा प्रदान करने वालों के ही आकाश में तारागण के रूप में दिव्य चमकीले चित्र हैं, दक्षिणा देने वाले ही भूलोक में सूर्य की भांति चमकते हैं, दक्षिणा देने वालों को अमरत्व प्राप्त होता है और दक्षिणा देने वाले ही दीर्घायु होकर जीवित रहते हैं । शास्त्रों में दक्षिणारहित यज्ञ को निष्फल बताया गया है । जिस वेदवेत्ता ने हवन …

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गुरु का महत्त्व क्यों ?

Gurudev

भारतीय संस्कृति में ‘आचार्य देवो भव’ कहकर गुरु को असीम श्रद्धा का पात्र माना गया है । गुरु शब्द में ‘गु’ का अर्थ अंधकार तथा ‘रु’ का दूर करने से लगाया जाता है । अर्थात जो अंधकार को दूर कर सके, वहीं गुरु है । वैसे, हमारे शास्त्रों में गुरु के अनेक अर्थ बताएं गए हैं । गुरु का महत्त्व …

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पैर उतने ही पसारो जितनी चादर की लम्बाई हो

Kachue or khargosh Ki khani

एक कछुआ यह सोचकर बड़ा दुखी रहता था कि पक्षीगण बड़ी आसानी से आकाश में उड़ा करते हैं , परन्तु मैं नही उड़ पाता । वह मन ही मन यह सोचविचार कर इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि यदि कोई मुझे एक बार भी आकाश में पहुँचा दे तो फिर मैं भी पक्षियो की तरह ही उड़ते हुये विचरण किया करूँ …

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सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में

cheen liya mera bhola sa maan Bhajan

हिन्दू धर्म में सोमनाथ मंदिर का अपना एक अलग ही स्थान है। सोमनाथ मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान प्राप्त है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इतना ही नहीं, कहते हैं महादेव अपने दरबार से किसी भी भक्त को खाली नहीं लौटने …

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