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सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में

cheen liya mera bhola sa maan Bhajan

हिन्दू धर्म में सोमनाथ मंदिर का अपना एक अलग ही स्थान है। सोमनाथ मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान प्राप्त है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इतना ही नहीं, कहते हैं महादेव अपने दरबार से किसी भी भक्त को खाली नहीं लौटने …

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सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में

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कैलाश मानसरोवर कैलाश पर्वत और मानसरोवर को धरती का केंद्र माना जाता है। यह हिमालय के केंद्र में है। मानसरोवर वह पवित्र जगह है, जिसे शिव का धाम माना जाता है। पुराणों के अनुसार यहाँ शिवजी का स्थायी निवास होने के कारण इस स्थान को 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह हिन्दुओं के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल है। …

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सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में

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महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। यह मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। ज्योतिर्लिग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी स्थापना अपने आप हुई है। इस स्थल पर जो भी श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी मनोकामनाएं निश्चित रूप से पूरी …

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सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में

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श्री वैद्यनाथ शिवलिंग समस्त ज्योतिर्लिंगों में नौवें स्थान पर है। यह झारखंड के देवघर जिले में स्थित है। देवघर शब्द का अर्थ है – ऐसा स्थान जहां देवी-देवता निवास करते हों। इसलिए इसे देवघर या बाबा धाम भी कहा जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसी भी द्वादश ज्योतिर्लिंग से अलग यहां के मंदिर के …

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सावन के पवित्र महीनें में जानिए शिवजी के पवित्र धामों के बारें में

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भगवान शिव का ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। इस स्थान पर नर्मदा के दो धाराओं में विभक्त हो जाने से बीच में एक टापू सा बन गया है। इस टापू को मांधाता पर्वत या शिवपुरी कहते हैं। नदी की एक धारा इस पर्वत के उत्तर और दूसरी दक्षिण होकर बहती है। दक्षिण वाली …

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हरि ॐ क्यों

krshnadarshan - bhagavaan shiv ke avataar

वेद पाठ के आरम्भ में मन्त्रोच्चारण से पूर्व हरि ॐ, उच्चारण करना वैदिकों की परम्परागत प्रणाली है इसका तात्पर्य यह है कि वेद के अशुद्ध उच्चारण में महापातक लगता है और बहुत सावधान रहने पर भी मनुष्य स्वभाव सुलभ स्वर वर्ण जन्य अशुद्धी हो जाने की पूरी सम्भावना रहती है अत: इस सम्भावित प्रत्यवाय की निवृति के लिए आदि और …

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क्या है शनि की क्रूर दृष्टि के पीछे की वजह !

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शनैश्चर का शरीर- कान्ति इन्द्रनील मणि के समान है। इनके सिरपर स्वर्ण मुकुट गले में माला तथ शरीर पर नीले रंग के वस्त्र सुशोभित हैं। ये गिद्ध पर सवार रहते हैं। हाथों में क्रमशः धनुष, बाण , त्रिशुल और वरमुद्रा धारण करते हैं।शनि भगवान सूर्य तथा छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। ये क्रूर ग्रह माने जाते हैं। इनकी दृष्टि में …

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एक ऐसा तीर्थ जहां स्वयं प्रभु राम ने की थी शिव जी की आराधना

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रामेश्वर ज्योतिर्लिंग में एकादशवें पर है श्री “रामेश्वर”। रामेश्वरतीर्थ को ही सेतुबन्ध तीर्थ कहा जाता है। यह स्थान तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थित है। यहाँ समुद्र के किनारे भगवान श्री रामेश्वरम का विशाल मन्दिर शोभित है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर श्रीरामचंद्रजी ने लंका के अभियान के पूर्व शिव की अराधना करके उनकी मूर्ति की स्थापना की …

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ईश्वर पर विश्वास

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किसी जंगल मे एक गर्भवती हिरणी थी, जिसका प्रसव होने को ही था | उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घास के पास एक जगह देखी जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा| अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू होने लगी, लगभग उसी समय आसमान मे काले काले बादल छा गए और घनघोर बिजली कड़कने लगी …

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क्या मरना भी मुहूर्त में ही?

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मुहूर्त विज्ञान उपक्रम मे इस बात का उदाहण मिलता है कि यदि मरने का मुहूर्त नहीं बनता था तो वे लोग अपना मरना भी स्थगित कर देते थे। आर्य जाति के गौरवपूर्ण इतिहास ग्रंथ में वर्णन आता है कि महाभारत के संग्राम के समय जब नौ दिन में ही भीष्मजी द्वारा कौरव सेना का संचालन करते हुए पांडवों की आधी …

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