दुर्योधन ने श्री कृष्ण की पूरी नारायणी सेना मांग ली थी। और अर्जुन ने केवल श्री कृष्ण को मांगा था। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की चुटकी (मजाक) लेते हुए कहा: "हार निश्चित हैं तेरी, हर दम रहेगा उदास ।
Read More »Guru_Profile
हनुमानजी देव हैं, देवताओं से ऊपर हैं
हनुमानजी देव हैं, देवताओं से ऊपर हैं. मैं ऐसा क्यों कहता हूं उसके पीछे कारण है. इंद्र भी देव हैं, बल्कि देवराज हैं. श्रीयुक्त हैं, यानी लक्ष्मीजी की कृपा छाया में हैं परंतु देवराज में मत्सर है. मत्सर यानी अभिमान, सृष्टि के अस्तित्व में अपने श्रेय को बढ़ा-चढ़ाकर देखने की लोलुपता, हर स्थान पर अपने गुणगान के लालायित रहने का …
Read More »नहीं थे राजा, हो रहे थे परेशान और जब मिले तो
एक बड़ा सा तालाब था उसमें सैकड़ों मेंढ़क रहते थे। तालाब में कोई राजा नहीं था। दिन पर दिन अनुशासनहीनता बढ़ती जाती थी और स्थिति को नियंत्रण में करने वाला कोई नहीं था। उसे ठीक करने का कोई यंत्र तंत्र मंत्र दिखाई नहीं देता था। नई पीढ़ी उत्तरदायित्व हीन थी। जो थोड़े बहुत होशियार मेंढ़क निकलते थे वे पढ़-लिखकर अपना …
Read More »जब विद्यार्थी की निर्भीकता के कायल हुए दादाजी
बहुत समय पहले बिले नामक एक विद्यार्थी था। उसकी खासियत थी कि वह खेलने के समय दिल लगाकर खेलता और पढ़ने के समय एकाग्रचित्त होकर पढ़ता। बिले साहसी था, अपने इसी गुण के कारण वह वृक्षों पर चढ़ जाता। यह सब कुछ देखकर उसके दादाजी को भय लगता। कहीं बिले उन वृक्षों से गिर न जाए। बिले का दादाजी मना …
Read More »दो पैसे के काम के लिए तीस साल की बलि!
स्वामी विवेकानंद एक बार कहीं जा रहे थे। रास्ते में नदी पड़ी तो वे वहीं रुक गए क्योंकि नदी पार कराने वाली नाव कहीं गई हुई थी। स्वामीजी बैठकर राह देखने लगे कि उधर से नाव लौटे तो नदी पार की जाए। एका-एक वहां एक महात्मा भी आ पहुंचे। स्वामीजी ने अपना परिचय देते हुए उनका परिचय लिया। बातों ही …
Read More »यकीन कीजिए! एक चाकू से भी ले सकते हैं सीख
जब स्वामी विवेकानंद शिकागो की धर्मसभा में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। तब वह यात्रा पर जाने से पूर्व वह स्वामी रामकृष्ण परमहंस की धर्मपत्नी गुरु मां शारदा से आशीर्वाद लेने गए। चरण स्पर्श के पश्चात गुरु मां से वह बोले, ‘मुझे भारतीय संस्कृति पर बोलने के लिए अमेरिका से आमंत्रण मिला है। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।’ मां …
Read More »विवेकानंद कहते थे – बंदरों की तरह होती हैं कठिनाइयां
घटना तब की है जब स्वामी विवेकानंद वृंदावन में थे। सड़क पर चल रहे थे। कुछ लाल मुंह के बंदर उनके पीछे पड़ गए। स्वामीजी भागने लगे। बंदर भी उन पर तेजी से आक्रमण करने लगे। तभी एक समझदार व्यक्ति ने कहा, भागो मत। इनके सामने डट कर खड़े रह जाओ। मुकाबला करो। स्वामीजी ने वैसा ही किया और बंदर …
Read More »स्वामी विवेकानंद ने सुना वेश्या का गीत
स्वामी विवेकानंद को विदेश जाने से पहले एक बार खेतड़ी (राजस्थान) जाना पड़ा क्योंकि वहां के महाराजा की कोई संतान नहीं थी और स्वामीजी के आशीर्वाद से पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई थी। इसी की खुशी में एक उत्सव मनाया जा रहा था। दरबार में कई सामंत, प्रजाजन और कलाकार उपस्थित थे। कार्यक्रम के आखिरी में एक गणिका (वेश्या) अपना नृत्य …
Read More »इसीलिए कहते हैं मां होती है दुनिया में महान
एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति ने स्वामी विवेकानंद से पूछा, ‘संसार में मां की महानता क्यों गाई जाती है?’ स्वामीजी ने मुस्कुराते हुए कहा, पांच सेर का एक पत्थर ले आओ। जब वह व्यक्ति पत्थर ले आया, तो स्वामीजी ने उससे कहा, ‘इसे कपड़े से लपेट कर पेट पर बांध लो और चौबीस घंटे बाद मेरे पास आना।’ उस व्यक्ति …
Read More »ये हैं रावण के वो 7 सपने जो रह गए अधूरे
शहरा पर्व को अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है. धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था. ये बात तो हम सभी जानते हैं लेकिन रावण से जुड़ी कुछ बातें ऐसी भी हैं जो बहुत ही कम लोग जानते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं महाज्ञानी रावण …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…