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Rama

गहरी सीख

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रामजी के वनवास काल में, घोर घने वन में चलते हुए, रामजी आगे चलते हैं,सीताजी बीच में और लक्ष्मणजी सबसे पीछे चलते हैं।सीताजी रामजी के...........

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वृंदावन चन्द्रोदय मंदिर

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दुनिया में अब तक का सबसे विशाल, भव्य और ऊंचा मंदिर वृंदावन में बनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण को समर्पित इस मंदिर का नाम चन्द्रोदय मंदिर है।

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श्री राम नाम महिमा

शास्‍त्रों के अनुसार संसार में 'राम' नाम से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इसके हर अक्षर में सुख की प्राप्ति है। 'रा' के उच्‍चारण करने से सब पाप बाहर.

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रामेश्वरजी का दर्शन

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भगवान राम रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का अपने हाथों से निर्माण करते हुए कहते है! हे लक्ष्मण ! जो मनुष्य मेरे द्वारा स्थापित किए हुए इन रामेश्वरजी.

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सती सुलोचना की कथा

सुलोचना वासुकी नाग की पुत्री और लंका के राजा रावण के पुत्र मेघनाद की पत्नी थी। लक्ष्मण के साथ हुए युद्ध में मेघनाद का वध हुआ।

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कृष्णा और सुदामा का मिलन

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तीनो लोको के स्वामी सुधबुद्ध खोकर दौड़े चले जा रहे थे, पीछे पीछे रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिन्दा, सत्या, लक्ष्मणा और भद्रा भी पागल सी दौड़ रही है, ये कौन आ गया जिसके लिए प्रभु श्री कृष्ण दौड़ रहे है | मंत्री, सेनापति, द्वारपाल सब जड़ होकर खड़े है, ऊपर ब्रह्मा जी , कैलाशपति, बृहस्पति, देवराज इंद्र, सूर्य, चन्द्र, यम,शनि …

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मूर्तिकार की कल्पना

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मूर्तिकार की कल्पना, उंगलियों की जादूगरी, छेनी की हजारों चोट और रेती की घिसाई। और इस तरह महीनों की तपस्या के बाद वह मूर्ति उभरती है, जिसमें देवता निवास करते हैं। पर मूर्ति से देवता होने की प्रक्रिया भी इतनी सहज कहाँ… सोच कर देखिये, पूरा संसार बड़े बड़े पत्थरों, पहाड़ों से भरा हुआ है। बड़े बड़े पहाड़ तोड़ कर …

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रामचरितमानस’ सुन्दर कांड- दोहा क्रमांक

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जो संपति सिव रावनहिंदीन्हि दिये दस माथसोई संपदा विभीसन्हिसकुचि दीन्ह रघुनाथ।। (‘रामचरितमानस’ सुन्दर कांड- दोहा क्रमांक 49 (ख)) प्रसंग है उस घटना का जब विभीषण अपने बड़े भाई रावण का साथ छोड़कर श्री राम की शरण में आये। मिलने पर विभीषण ने श्री राम से केवल उनकी भक्ति मांगी। श्री राम ने उन्हें अपनी भक्ति तो दी ही, साथ ही …

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मैं भी तो ब्राह्मण हूं

, जो एक जनेऊ हनुमान जी के लिए ले आये थे। संयोग से मैं उनके ठीक पीछे लाइन में खड़ा था, मेंने सुना वो पुजारी से कह रहे थे कि वह स्वयं का काता (बनाया) हुआ जनेऊ हनुमान जी को पहनाना चाहते हैं, पुजारी ने जनेऊ तो ले लिया पर पहनाया नहीं। जब ब्राह्मण ने पुन: आग्रह किया तो पुजारी बोले यह तो हनुमान जी का श्रृंगार है इसके लिए बड़े पुजारी (महन्त) जी से अनुमति लेनी होगी,

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