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Gyan Ganga

तपस्विनी उर्मिला!!

“मानस-मंदिर में सती पति की प्रतिमा थाप,जलती सी उस विरह में बनी आरती आप !आँखों में प्रिय मूर्ति थी भूले थे सब भोग,हुआ योग से भी अधिक उसका विषम-वियोग !आठ पहर चौंसठ घड़ी स्वामी का ही ध्यान,छूट गया पीछे स्वयं उससे आत्मज्ञान ! ,, “तपस्विनी उर्मिला”उर्मिला इस धरा की अनमोल मोती है . रामायण की सबसे मूक एवं गम्भीर नायिका …

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सनातन धर्म में वैशाख मास का महत्व!!

सनातन धर्म में वैशाख मास का काफी महत्व है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है।इस साल यह शुभ तिथि ३ मई दिन मंगलवार को है । इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। यह पर्व शोभन, मातंग और लक्ष्मी योग में मनाया जाएगा। इस साल तृतीया तिथि मंगलवार को …

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जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा!!

जब मैं बूढ़ा हो जाऊँगा, एकदम जर्जर बूढ़ा, तब तू क्या थोड़ा मेरे पास रहेगा? मुझ पर थोड़ा धीरज तो रखेगा न? मान ले, तेरे महँगे काँच का बर्तन मेरे हाथ से अचानक गिर जाए या फिर मैं सब्ज़ी की कटोरी उलट दूँ टेबल पर, मैं तब बहुत अच्छे से नहीं देख सकूँगा न! मुझे तू चिल्लाकर डाँटना मत प्लीज़! …

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राधा – कृष्ण !!

श्री कृष्ण भगवान जी ने. गुरु द्रोणाचार्य जी से कहा…शस्त्र उठाने से पूर्व. मेरे एक प्रश्न पर चिंतन अवश्य कीजिएगा.यदि मैं आपसे कहूं. जो अश्वत्थामा मरा है. वास्तव में वह. आपका पुत्र नहीं एक हाथी था. तो क्या आपका जीवन आपको पुण: मधुर प्रतीत होने लगेगा. क्याआपका ह्रदय करुणा से भर जाएगा… .…गुरु द्रोणाचार्य जी ने श्री कृष्ण भगवान जी …

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प्याऊ!!

आसमान से आग बरस रही थी ऐसे में अधिकांश लोग घरों में रहने को मजबूर थे सुबह तकरीबन ग्यारह बजे जब रमेश ने दरवाजा खोला तो फिर से उसके घर के बाहर वहीं बुजुर्ग महिला अपनी रेहड़ी लगाएं खड़ी थी तू फिर यहां …. मना किया था ना पता नहीं कब सुधरेंगे ये लोग चल सका यहां से अपना बोरिया …

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भगवान को भेंट

पुरानी बात है, एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था। सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था। जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था।.वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था। वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि का लाभ लेता रहता था।.एक दिन उस ने सेठ से श्री …

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व्यक्तिगत अनुभव!!

गर्मी का दिन था।जंगल में एक लकड़बग्घा प्यास से तड़प रहा था ,साथ ही साथ वो पानी के तलाश में जंगल में इधर उधर भटक रहा था।तभी घूमते हुए उसे एक नदी दिखाई पड़ी।दूर से देखने पर नदी में पानी कम लग रहा था फ़िरभी उसने दौड़कर जल्दी से अपनी प्यास बुझाई।भरपेट पानी पीने के बाद लकड़बग्घा मानो तृप्त हो …

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माँ का स्नेह!!

जब हम छोटे थे तब माँ रोटियां एक स्टील के कटोरदान में रखा करती थी। रोटी रखने से पहले कटोरदान में एक कपडा बिछाती वो कपडा भी उनकी पुरानी सूती साड़ी से फाड़ा हुआ होता था।वो कपडा गर्म रोटियों की भाप से गिरने वाले पानी को सोख लेता था, जैसे माँ की साड़ी का पल्लू सोख लेता था, हमारे माथे …

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प्रेम व करूणा ईश्वरीय गुण है!!

अहंकार, प्रेम का अभाव है, जो प्रेमपूर्ण है, प्रेममय है, वह कभी अहंकारी नहीं हो सकता। प्रेम, करूणा के अभाव के कारण भीतर का ख़ालीपन पैदा होता है, यानि जो चित्त प्रेम व करूणा से शून्य होगा, वो एक दम ख़ाली होगा।और भीतर के ख़ालीपन को भरने के लिए कुछ न कुछ तो चाहिए ही, तो अहंकार उस ख़ालीपन को …

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हिन्दी भाषा की जान हैं!!

हिंदी का थोडा़ आनंद लीजिये…मुस्कुराइए…(ये मैंने नहीं लिखा है, काश कि लिखा होता!)हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे हैं,खाने पीने की चीजों से भरे हैं…कहीं पर फल हैं तो कहीं आटा-दालें है,कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले हैं ,चलो, फलों से ही शुरू करते हैं,एक एक कर सबके मजे लेते हैं…यहां आम के आम और गुठलियों के भी दाम …

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