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Gyan Ganga

पत्नी स्वर्ग का साधन है

कश्यपस्मृति में कहा गया है, दाराधीना क्रियाः स्वर्गस्य साधनम्। तीर्थयात्रा, दान, श्राद्धादि जितने भी सत्कर्म हैं, वे सभी पत्नी के अधीन हैं। अतः पत्नी स्वर्ग का साधन है। यह भी कहा गया है कि नास्ति भार्यासमं तीर्थम् अर्थात् पत्नी साक्षात् तीर्थ है। स्वामी सत्यमित्रानंदगिरिजी धर्म प्रचार के लिए अमेरिका गए, तो एक अमेरिकी ने उनसे पूछा, ‘क्या भारत में पति …

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जहाँ धर्म, वहीं विजय

महानारायणोपनिषद् में कहा गया है, धर्मों विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा अर्थात् धर्म ही समस्त संसार की प्रतिष्ठा का मूल है। भगवान् श्रीकृष्ण भी कहते हैं कि प्राणों पर संकट भले ही आ जाए, फिर भी धर्म पालन से डिगना नहीं चाहिए। महाभारत युद्ध के दौरान दुर्योधन प्रतिदिन माता गांधारी के पास पहुँचकर विजय की कामना के लिए आशीर्वाद की याचना किया …

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अब तो लिया री हाथ तेरा थाम

हो गई हो गई रे घनी बदनाम हो कन्हिया मैं तो साड़ी मेंअब तो लिया री हाथ तेरा थाम हो डरो न इस वारे मेंहो गई हो गई रे घनी बदनाम……. घर घर मेरी और तुम्हारी चर्चा बरसाने मेंकरे श्याम से न्यारी राधा हिम्मत नही जमाने में,मैं तो भूल गई रे सब काम हो आत्मा मोहन प्यारी मेंअब तो लिया …

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मानव में भगवान्

रामचंद्र डोंगरेजी महाराज परम विरक्त व ब्रह्मनिष्ठ संत थे। उन्होंने अपने जीवन में सौ से अधिक कथाएँ सुनाई, पर दक्षिणा में एक पैसा भी स्वीकार नहीं किया। कथा के चढ़ावे के लिए आने वाला तमाम धन वे असहाय व अभावग्रस्तों के लिए भोजन की व्यवस्था और गरीब कन्याओं के विवाह के लिए भेंट कर देते थे। अन्नदान को वे सर्वोपरि …

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दान का मूल्यांकन

प्रत्येक धर्मशास्त्र में सत्य, अहिंसा, दया, दान, उपवास आदि की महत्ता बताई गई है। इन्हें धर्म का अंग बताया गया है। साथ ही इनका पालन करते समय विवेक-बुद्धि से आकलन की भी प्रेरणा दी गई है। सत्य पर अटल रहना चाहिए, झूठ कदापि नहीं बोलना चाहिए, किंतु यदि सत्य बोलने के संकल्प के कारण किसी निर्दोष के प्राणों पर संकट …

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तृष्णा के दुष्परिणाम

तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ काशी नरेश राजा विश्वसेन के पुत्र थे। पिता ने सोलह वर्ष की आयु में ही उन्हें सत्ता सौंप दी थी, लेकिन कुछ ही वर्षों में सांसारिक सुखों से उन्हें विरक्ति होने लगी। एक दिन उन्होंने अपने पिताश्री से कहा, ‘मैंने काफी समय तक राजा के रूप में सांसारिक सुख-सुविधाओं का उपभोग किया है, फिर भी सुख के …

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नमो नमो वृंदावन चन्द

नमो नमो वृंदावन चन्दजहाँ विलाश करत प्रिया प्रियतमस्व इक्षा मई स्व इक्षा ….नमो नमो वृंदावन चन्द, कबहू जात नही ताको तज, नित्य किशोर बिहारीनित्य किशोर बिहारी….सेवत रहत ताहि निज कर सोवैकुण्ठादि विसारि … नमो नमो वृंदावन चन्द, और लोक अवतार अष्ट ली, यह निज वन राजधानीयह निज वन राजधानी…..चारो और भरयो जमना जलउज्ज्वल रस की खानी….नमो नमो वृंदावन चन्द, प्रेम …

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क्यों सताए मुझे क्यों रुलाये मुझे

क्यों सताए मुझे क्यों रुलाये मुझेइतना तो बोल दे मोहनचुप क्यों है बोल दे मोहनक्यों सताए मुझे…………. इतना बेदर्द क्यों हो गया है तूअब तू बोल ज़रा किस्से जाके कहूंइतना दर्द मिला मैं सहन कैसेअब तो सुन भी ले मोहनचुप क्यों है बोल दे मोहन.. सबके तो सामने मैं तो हंसती रहीआंसू आँखों में अपने छिपाती रहीअब तो आंसू मेरे …

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प्राणी में भगवान्

अफ्रीका के एक गाँव में जन्मे आगस्टाइन जन्मजात प्रतिभाशाली थे। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे अमेरिका की मिलान यूनिवर्सिटी में शिक्षक नियुक्त हुए। वे ‘खाओ-पीओ मौज करो’ के सिद्धांत में विश्वास रखते थे और असंयम व स्वेच्छाचारी जीवन बिताते थे। एक दिन वे ईसाई प्रचारक पादरी एंबोसे के सत्संग में गए। मनुष्य को असत्य, हिंसा, यौनाचार आदि का …

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सत्य, शील और विद्या

एक बार आचार्य चाणक्य से किसी ने प्रश्न किया, ‘मानव को स्वर्ग प्राप्ति के लिए क्या-क्या उपाय करने चाहिए?’ चाणक्य ने संक्षेप में उत्तर दिया, ‘जिसकी पत्नी और पुत्र आज्ञाकारी हों, सद्गुणी हों तथा अपनी उपलब्ध संपत्ति पर संतोष करते हों, वह स्वर्ग में नहीं, तो और कहाँ वास करता है! आचार्य चाणक्य सत्य, शील और विद्या को लोक-परलोक के …

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