गले में नागो की माला जट्टो में गंगा जी की धारा महादेवा भोले कैसे करूं मैं तेरी सेवा, शम्भू कैसे करूं मैं तेरी सेवा, दिल करता है जल मैं चडाऊ, जल लेने को नदियों में जाऊ नदिया देने को तेयार मछली करती है इनकार महादेवा भोले कैसे करूं मैं तेरी सेवा, शम्भू कैसे करूं मैं तेरी सेवा, दिल करता है …
Read More »Gyan Ganga
सन्यासी की जड़ी-बूटी
बहुत समय पहले की बात है , एक वृद्ध सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहता था. वह बड़ा ज्ञानी था और उसकी बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर -दूर तक फैली थी. एक दिन एक औरत उसके पास पहुंची और अपना दुखड़ा रोने लगी , ” बाबा, मेरा पति मुझसे बहुत प्रेम करता था , लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा …
Read More »झूठी दुनिया से मन को हटाले
झूठी दुनिया से मन को हटाले ध्यान भोले जी के चरणों में लगाले नसीबा तेरा जाग जाएगा, नसीबा तेरा जाग जाएगा. झूठे संसार का तो चलना अनोखा है पग पग मिले यहाँ धोखा ही धोखा है भोले बाबा को तू अपना बना ले माल तेरे पास है तोह माल तेरा खायेंगे हुआ जो ख़तम तोह नजर नही आयेंगे डमरू वाले …
Read More »गुरुदेव तुम्हारी जय जय हो
गुरुदेव तुम्हारी जय जय हो सद्गुरु तुम्हारी जय जय हो सोमनाथ तुम्हारी जय जय हो रामनाथ तुम्हारी जय जय हो विश्वनाथ तुम्हारी जय जय हो भोले नाथ तुम्हारी जय जय हो महादेव तुम्हारी जय जय हो महाकाल तुम्हारी जय जय हो केदारनाथ तुम्हारी जय जय हो त्रिम्ब्केश्वर तुम्हारी जय जय हो नागेश्वर तुम्हारी जय जय हो मलिकार्जुन तुम्हारी जय जय …
Read More »जोकर की सीख
एक बार एक जोकर सर्कस मे लोगो को एक चुटकुला सुना रहा था। चुटकुला सुनकर लोग खूब जोर-जोर से हंसने लगे । कुछ देर बाद जोकर ने वही चुटकुला दुबारा सुनाया । अबकी बार कम लोग हंसे । थोडा और समय बीतेने के बाद तीसरी बार भी जोकर ने वही चुटकुला सुनाना शुरू किया । पर इससे पहले कि वो अपनी बात …
Read More »चल पड़ा शिव का पुजारी शिव को मनाने के लिए
चल पड़ा शिव का पुजारी शिव को मनाने के लिए हाथ में गंगा जल गडवा शिव को चड़ने के लिए बैठ गया शिवलिंग के आगे, करने लगा अस्तुतीयाँ हाथ जब ऊपर उठाया, घंटा बजाने के लिए देख कर सोने का घंटा, पाप मन में आ गया हो गया तैयार वह तो घंटा चुराने के लिए चढ़ गया शिवलिंग के ऊपर …
Read More »मूर्ख गधा
एक बार दो गधे अपनी पीठ पर बोझा उठाये चले जा रहे थे, उनको काफी लंबा सफर तय करना था.. एक गधे की पीठ पर नमक की भारी बोरियां लदी हुई थीं तो एक की पीठ पर रूई की बोरियां लदी हुई थीं. जिस रास्ते से वो जा रहे थे उस बीच में एक नदी पड़ी, नदी के ऊपर रेत …
Read More »हार-जीत-का-फैसला!
बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ मेँ निर्णायक थीँ- मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती। हार-जीत का निर्णय होना बाक़ी था, इसी बीच देवी भारती को शाश्त्रार्थ किसी आवश्यक कार्य से कुछ समय के लिये बाहर जाना पड़ गया। लेकिन जाने से पहले देवी भारती नेँ दोनोँ ही विद्वानोँ …
Read More »दूसरा दीपक
एक बार की बात है , मगध साम्राज्य के सेनापति किसी व्यक्तिगत काम से चाणक्य से मिलने पाटलिपुत्र पहुंचे । शाम ढल चुकी थी , चाणक्य गंगा तट पर अपनी कुटिया में, दीपक के प्रकाश में कुछ लिख रहे थे। कुछ देर बाद जब सेनापति भीतर दाखिल हुए, उनके प्रवेश करते ही चाणक्य ने सेवक को आवाज़ लगायी और कहा …
Read More »एक पुत्र अपने पिता के विषय में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर क्या विचार रखता है
4 वर्ष : मेरे पापा महान है । 6 वर्ष : मेरे पापा सबकुछ जानते है, वे सबसे होशियार है।। 10 वर्ष : मेरे पापा अच्छे है, परन्तु गुस्से वाले है। 12 वर्ष : मैं जब छोटा था, तब मेरे पापा मेरे साथ अच्छा व्यवहार करते थे । 16 वर्ष : मेरे पापा वर्तमान समय के साथ नही चलते, सच …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…