Breaking News

Hindu

परंपरा का निर्माण

जीवन के साथ आयुर्वेद का गहरा संबंध होने के कारण पितामह ब्रह्मा ने आयुर्वेद के पठन – पाठन की परंपरा स्थापित की । ब्रह्मा जी ने इस चिकित्सा – शास्त्र को अपने मानसपुत्र दक्ष को और दक्ष ने अश्विनीकुमारों को तथा अश्विनीकुमारों ने देवराज इंद्र को पढ़ाया । इस तरह यह परंपरा आजतक चलती चली आ रही है । यद्यपि …

Read More »

चिकित्सकों के चिकित्सक भगवान शिव

krshnadarshan - bhagavaan shiv ke avataar

भगवान रुद्र ने ओषधियों का निर्माण करके जगत का इतना कल्याण किया है कि वेद ने भी भगवान शंकर सम्पूर्ण शरीर को ही भेषज मान लिया है । कहा है कि – या ते रुद्र शिवा तनू शिवा विश्वस्य भेषजी । शिवा रुद्रस्य भेषजी तया नो मृड जीवसे ।। सचमुच आयुर्वेद भगवान शिव के रूप में ही अभिव्यक्त हुआ था, …

Read More »

दक्षिणा क्यों है महत्त्वपूर्ण

khud to baahar hee khade rahe

दक्षिणा प्रदान करने वालों के ही आकाश में तारागण के रूप में दिव्य चमकीले चित्र हैं, दक्षिणा देने वाले ही भूलोक में सूर्य की भांति चमकते हैं, दक्षिणा देने वालों को अमरत्व प्राप्त होता है और दक्षिणा देने वाले ही दीर्घायु होकर जीवित रहते हैं । शास्त्रों में दक्षिणारहित यज्ञ को निष्फल बताया गया है । जिस वेदवेत्ता ने हवन …

Read More »

संस्कार क्या हैं ?

vyarth hai moh ka bandhan

भारतीय संस्कृति में संस्कार का साधारण अर्थ किसी दोषयुक्त वस्तु को दोषरहित करना है । अर्थात् जिस प्रक्रिया से वस्तु को दोषरहित किया जाएं उसमें अतिशय का आदान कर देना ही ‘संस्कार’ है । संस्कार मन:शोधन की प्रक्रिया हैं । गौतम धर्मसूत्र के अनुसार संस्कार उसे कहते हैं, जिससे दोष हटते हैं और गुणों की वृद्धि होती है । हमारे …

Read More »

जन्म – कर्म

Abhimanu Mahabharat Mahakavye

भगवान के जन्म – कर्म की दिव्यता एक अलौकिक और रहस्यमय विषय है, इसके तत्त्व को वास्तव में तो भगवान ही जानते है अथवा यत्किंचित उनके वे भक्त जानते हैं, जिनको उनकी दिव्य मूर्ति का प्रत्यक्ष दर्शन हुआ हो, परंतु वे भी जैसा जानते हैं कदाचित वैसा कह नहीं सकते । जब एक साधारण विषय को भी मनुष्य जिस प्रकार …

Read More »

भगवान शिव के अवतार

Rakshak Parbhu

जो ब्रह्मा होकर समस्त लोकों की सृष्टि करते हैं, विष्णु होकर सबका पालन करते हैं और अंत में रुद्ररूप से सबका संहार करते हैं, वे सदाशिव मेरी परमगति हों । शैवागम में रुद्र के छठें स्वरूप को सदाशिव कहा गया है । शिवपुराण के अनुसार सर्वप्रथम निराकार परब्रह्म रुद्र ने अपनी लीला शक्ति से अपने लिए मूर्ति की कल्पना की …

Read More »

भगवान कौन है ? (Who is God?)

Who is God?

प्राय: यह प्रश्न किया जाता है – भगवान कौन है ? और यह भगवान कहां रहता है ? गीता में कृष्ण ने कहा है – ‘मन की आंखें खोलकर देख, तू मुझे अपने भीतर ही पाएगा’ । भगवान कण – कण में व्याप्त हैं । ‘भगवान’ नाम कब प्रारंभ हुआ ? किसने यह नाम दिया, यह कोई नहीं जानता । …

Read More »

कृष्णदर्शन – भगवान शिव के अवतार

krshnadarshan - bhagavaan shiv ke avataar

श्राद्धदेव नामक मनु के सबसे छोटे पुत्र का नाम नभग था । भगवान शिव ने उन्हें ज्ञान प्रदान किया था । मनुपुत्र नभग बड़े ही बुद्धिमान थे । जिस समय नभग गुरुकुल में निवास कर रहे थे उसी बीच उनके इक्ष्वाकु आदि भाईयों ने नभग लिए कोई भाग न देकर पिता की सारी संपत्ति आपस में बांट ली और अपना …

Read More »

भगवान शिव

anupam roop neelamani ko ree

शैवागम में रुद्र के सातवें स्वरूप को शिव कहा गया है । शिव शब्द नित्य विज्ञानानंदघन परमात्मा का वाचक है । इसलिए शैवागम भगवान शिव को गायत्री के द्वारा प्रतिपाद्य एवं एकाक्षर ओंकार का वाच्यार्थ मानता है । शिव शब्द की उत्पत्ति ‘वश कान्तौ’ धातु से हुई है, जिसका तात्पर्य यह है कि जिसको सब चाहते हैं, उसका नाम शिव …

Read More »

भगवान शिव का अवधूतेश्वरावतार

Avdhuteshwar incarnation of Lord Shiva

एक बार देवराज इंद्र देवताओं और बृहस्पति के साथ भगवान शिव का दर्शन करने के लिए कैलाश परिवत पर गए । उस समय बृहस्पति और इंद्र के आगमन कू बात जानकर भगवान शंकर उनकी परीक्षा लेने के लिए अवधूत बन गए । उनके शरीर पर कोई वस्त्र नहीं था । वे प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी होने के कारण महाभयंकर …

Read More »