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मौन पर बुद्ध कहानी

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आश्रम के सभी बच्चे जब दूसरे कामों में लगे होते थे तो एक बच्चा एक कोने में बैठा चुपचाप अपने आप में खोया रहता था। वो अक्सर किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। आश्रम की सभी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद जहाँ सभी बच्चे पूरे दिन की घटनाओं की चर्चा करने लगते हैं, वही पर वो शांत रहने वाला …

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AM और PM का उद्गगम भारत में

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क्या आप जानते हैं की समयसूचक AM और PM का उद्गगम भारत में ही हुआ था …?? लेकिन हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है : AM : Ante Meridian PM : Post Meridian एंटे यानि पहले, लेकिन किसके? पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके? यह कभी …

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अधूरे प्यार की एक अधूरी कहानी

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प्यार वो एहसास है, जो हर किसी को नहीं होता। प्यार वो महसूस है। जिसके अंदर खो जाने का दिल करता है। यही एक एहसास मैं आपको बताना चाहता हूँ। शाम का समय था। मैं अपने दोस्त का इंतजार कर रहा था। स्टेशन के बाहर। हमलोग का बाहर कही घूमने जाने का प्लान था और मैं जल्दी पहुँच गया था। …

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बचपन की यादें

एक शहर की एक गली में एक पुराना मकान था। उसमें एक बूढ़ा व्यक्ति रहता था। उसका न कोई रिश्तेदार था न कोई दोस्त। वह हमेशा अकेला रहता था। इस पुराने मकान के ठीक सामने एक छोटा-सा घर था।उस घर में एक छोटा बच्चा रोहित, अपने माता-पिता के साथ रहता था। बूढ़े व्यक्ति को बच्चे बहुत अच्छे लगते थे। वह …

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मेरे बचपन की कहानी

मेरे बचपन के वक़्त तो मुर्गों की बांग नींद से जगाती थी, कभी बाबा के तानें , तो कभी मम्मी का प्यार , बिस्तर छुड़वाती थी।सूरज के जगने से पहले ही , दिन शुरू हो जाता था । हर कोई अपने काम को लेकर , काम में लग जाता था ।नहा धोकर स्कूल जाने को सब तैयार होते थे, जिनको …

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जमींदार और गरीब बुढ़िया की कहानी

किसी श्रीमान ज़मींदार के महल के पास एक ग़रीब अनाथ विधवा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई, विधवा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी; उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी उसी झोंपड़ी में मर गया था। पतोहू …

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ज्यादा अच्छे मत बनो, नहीं तो हमेशा दुखी रहोगे

मानव स्वभाव पर बुद्ध कहानी आचार्य चाणक्य ने कहा था कि इंसान को ज्यादा सीधा भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि अगर हम जंगल में जाकर देखे तो, जान पाएंगे की सीधे पेड काट दिए जाते हैं जबकि टेढे मेढे पेड छोड दिए जाते हैं। तो आज की हमारी ब्लॉग पोस्ट भी इसी बारे में है कि ज्यादा अच्छा बना बुरा …

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आदमी मुसाफिर है आता है जाता है

किशोर दा प्लेबैक सिंगिंग में एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी होने के बावजूद आपस में न केवल बहुत अच्छे दोस्त थे वरन् दुख-सुख में भी हमेशा साथ होते थे।

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चिठ्ठी

बहनें परेशान हो चुकी थीं। इस बार राखी पर अपने भाई से साफ-साफ बात कर लेने की ठान कर चारों मायके आई... यही एक ऐसा त्योहार होता था जब चारों बहने मायके आती थी.

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ठंडे झोके

रसोई से भागने का मन कर रहा था सुधा का.... आधा काम भी नहीं निपटा था पसीने से लथ-पथ मारे गरमी के बेहाल हुई जा रही थी .... घर मे एकदम पीछे की तरफ बनी रसोई में तनिक भी हवा की गुंजाइश नहीं है......... उसे बेटी आराध्या की बहुत याद आ रही थी.

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