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चलो री सखी वृन्दावन को आज


चलो री सखी वृन्दावन को आज

चलो री सखी वृन्दावन को आज,
ब्रज रजकण रसमय अतिपावन,
प्रभु बांकेबिहारी को राज,
चलो री सखी वृन्दावन को आज

जहँ नाचत गावत राधे राधे,
पुरवासी संत समाज,
चलो री सखी वृन्दावन को आज

दधि बेचि हरि दरसन पइबै,
सखी इक पंथ दू काज,
चलो री सखी वृन्दावन को आज………,


मुझे नींद भी ना आये आये हाय हाय,
मुझे चैन भी ना आये आये हाय हाय,
घडी जीवन की बीती जाये जाये जाये,
हाय मुझे नींद भी ना आये….

बिन दर्शन के सुना जीवन सुना है ये तन मन,
ढूंढ चूका सारा ब्रिज मंडल गोवर्धन वृन्दावन,
तेरे दर्शन को नैना ललचाये आये हाय हाय,
मुझे नीँद भी ना आए….

बिन पानी के मश्ली तड़पे यु तड़पे मन मेरा,
बिन दर्शन के छाया इस दुनिया में गोर अँधेरा,
नैना सावन से नेहा बरसाए आये हाय हाय,
मुझे नीँद भी ना आए……..

कहा मिलु तुमसे मन मोहन गुडा सभी ज़माना,
किसे पुछु कौन बताये तेरा पता ठिकाना,
रात दिन याद तेरी सिताये आये हाय हाय,
मुझे नीँद भी ना आए…..

जबसे तेरे संग प्रीत लगी है चैन नींद तो खोये,
बिरख रहा है प्यार तुम्हारा तड़प तड़प दिल रोये,
तेरे पागल को कौन समजाये आये हाय हाय,
मुझे नीँद भी ना आए……………

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