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कान्हा मार गेयो पिचारी


कान्हा मार गेयो पिचारी के राधा रंगा रंग हो गई
कहा छिप गयो कृष्ण मुरारी के राधा रानी तंग हो गई

खेलु खेलु मोरे कान्हा के संग होली
रंग दे रंग दे मोहे अपने ही रंग में
रे तेरे नाम की मैं चुनर ओडू,
कहा छिप गयो कृष्ण मुरारी के राधा रानी तंग हो गई

मैं छोड़ के लाज शरम को हजा तेरे तन मन में समा सजाऊ
ओ कान्हा मोरे कान्हा मत वाले तेरी इक अदा पे लुट जाऊ
मैं भूल के दुनिया सारी,
ओ कान्हा तेरे संग हो गई………..,


सांवरिया हुआ मैं तो तुझमे मगन
लागी लगन थारी लागी लगन
लागी लगन श्याम लागी लगन
लागी लगन थारी लागी लगन
सांवरिया हुआ मैं तो तुझमे मगन ………..

भजनो में तेरे श्याम खुशियां झलकती
फूलों से इत्र की खुशबु महकती
खुशियों से श्याम भरो मेरा दामन
लागी लगन थारी लागी लगन
सांवरिया हुआ मैं तो तुझमे मगन ………..

आँखों से कृपा की मस्त बरसती
होंठों से खुशियों की लाली चमकती
नज़रों से करो श्याम नज़र का मिलान
लागी लगन थारी लागी लगन
सांवरिया हुआ मैं तो तुझमे मगन ………..

भजनो से जाएगी मेरे मन की उमंग
दौड़ गई मेरे मन में तरंग
कुलदीप की दुनिया करदी चमन
लागी लगन थारी लागी लगन
सांवरिया हुआ मैं तो तुझमे मगन ……..

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