श्याम सवेरे मुझसे मुरली कहती है
मेरे दिल में राधा तू ही रेहती है,
तू दिल में रहती है
याहा भी जाऊ राधे राधे मेहलो में या उपवन में
मोर की कल्की राधे राधे राधे राधे हो मन में
यमुना की लेहरे भी मुझसे केहती है,
मेरे दिल में राधा तू ही रहती है
गईया चराऊ राधे राधे पंशी मुझसे केहते है
राधा नाम के सगर में तो कितने कन्हियाँ रेहते है
प्यार की धारा नस नस में यु बेहती है,
मेरे दिल में राधा तू ही रहती है
ग्वाल बाल और सारी गोपियाँ राधा मुझे सताती है
राधा राधा केह के क्यों इतना तडपाती है,
मेरी धडकन कितना कुछ यु सेहती है,
मेरे दिल में राधा तू ही रहती है……………….
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