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मेरी उमर बीत गई गोकुल में


श्यामा आन वसो वृंदावन में मेरी उमर बीत गई गोकुल में

श्यामा रस्ते में भाग लगा जाना
फूल भीनु गी तेरी माला के लिए
तेरी बाट निहारु कुंजन में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में

श्यामा रस्ते में कुया खुद वा जाना
मैं तो नीर भरू गी तेरे लिए
मैं तुझे नेह्लाउगी मल मल के
मेरी उमर बीत गई गोकुल में

श्यामा मुरली मधुर सुना जाना
मोहे आकर दर्श दिखा जाना
तेरी सूरत बसी है अखियाँ में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में

श्यामा वृंदावन में आ जाना
आ कर के रास रचा जाना
सुनी गोकुल की गलियां में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में

श्यामा माखन चुराने आ जाना
आ कर के दही विखरा जाना
बस आप रहो मेरे मन में
मेरी उमर बीत गई गोकुल में………….

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