मोहे भूल गए सांवरिया,
आवन केह गए अजहू न आये,
लीनी न मोरी खबरिया
मोहे भूल गए सांवरिया……
दिल को दीये क्यों दुःख बिरहा के
तोड़ दिया क्यों मेहल बना के
आस दिला के ओह बेदर्दी खेली काहे मचरिया,
मोहे भूल गए सांवरिया……
नैन कहे रो रो के सजना,
देख चुके हम प्यार का सपना प्रीत है झूठी प्रीतम झूठा
झूठी है सारी नगरिया
मोहे भूल गए सांवरिया……….
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे ढूँढूँ रे सांवरिया
कान्हा – कान्हा रट के मैं तो हो गई रे बावरिया
बेदर्दी मोहन ने मोहे फूँका ग़म की आग में
बिरहा की चिंगारी भर दी दुखिया के सुहाग में
पल-पल मनवा रोए छलके नैनों की गगरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
आई थी अँखियों में लेकर सपने क्या-क्या प्यार के
जाती हूँ दो आँसू लेकर आशाएं सब हार के
दुनिया के मेले में लुट गई जीवन की गठरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
दर्शन के दो भूखे नैना जीवन भर न सोएंगे
बिछड़े साजन तुमरे कारण रातों को हम रोएंगे
अब न जाने रामा कैसे बीतेगी उमरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
wish4me Your wish may come true today…