नन्द भवन नन्द लाल ठुमक चलन लागे
पीछे माँ यशोमती बाबा नन्द आगे
लाल चलन लागे
लघु लघु पद ढगमग शिखन छवि जग मग जग मग
किनी किनी धुन सुन सुन कर भूमि भाग जागे
लाल चलन लागे
आंगन की शोभा पर तीन लोक नोश्यावर,
देवा सुर देख देख के अनुरागे रागे
लाल चलन लागे
अष्ट सखी अष्ट सखा सिर पर है मोर पखा
दभी के हित और कौन शीर सिन्धु त्यागे
लाल चलन लागे……..,
जग उज्यारा छाए, मन का अन्धेरा जाए,
किरणों की रानी गाए, जागो हे मेरे मन मोहन, प्यारे
जागे रे जागे रे सारी कालिया जागी
नगर नगर सब कालिया जागी,
जागे रे जागे रे, जागे रे जागे रे जग जग
जागो मोहन प्यारे, जागो…
नवयुग चूमे नैन तिहारे
भीगी भीगी अखिओं से मुस्काए, यह नयी भोर तोहे अंग लगाए
बाहे फैलाओ ओ दुःख हारे, जागो मोहन प्यारे, जागो…
जिसने मन का दीप जलाया, दुनिया को उसने ही उजला पाया
मत रहना अखिओं के सहारे, जागो मोहन प्यारे, जागो…
किरण परी गगरी छलकाए, ज्योत का प्यासा प्यास भुझाए
फूल बने मन के अंगारे, जागो मोहन प्यारे, जागो……
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