प्रथमहिं करवट लेत कन्हैया,
मनत महल अभिषेक महोत्सव,
नन्द दुअरवाँ बजत बधैया,
प्रथमहिं करवट————-2
मंत्रोच्चार करत मुनि ब्राह्मण,
संग गोपिन यशुमति लेत बलैया,
प्रथमहि करवट————2
धन धान्य संग नन्द लुटावत,
स्वर्ण सुसज्जित सुन्दर गईया,
प्रथमहिं करवट —————-2
देवन ब्योम कुसुम बर्षावत,
लाल लाल कोपल हरि पइयाँ,
प्रथमहिं करवट लेत कन्हैया……….,
दीदार निराला है तेरा शृंगार निराला है तेरा,
प्यारा तू प्यारा श्याम मुझे अंदाज निराला है तेरा,
दीदार निराला है तेरा शृंगार निराला है तेरा,
सेठो का सेठ कहावे तू संकट में दौड़ा आवे तू,
भरता है झोलियाँ मुँह मांगी,
व्यापार निराला है तेरा,
दीदार निराला है तेरा शृंगार निराला है तेरा,
जादू है या के करिश्मा है दीवाने है हम तू रहनुमा है,
जिसको देखो वो झूम रहा,
संसार निराला है तेरा,
दीदार निराला है तेरा शृंगार निराला है तेरा,
बड़ी मौज है तेरी भक्ति में हु मस्त मैं तेरी मस्ती में,
लेहरी लुटे तू बाँट रहा,
भंडार निराला है तेरा,
दीदार निराला है तेरा शृंगार निराला है तेरा……..
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