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राधा तेरी चुनरी जो लहराये


छेड़ा तो छोडू गी ना ओ नन्द लाला
समजो न भोली भाली गोकुल की ग्वाला
बरसाने की हु मजा दूंगी चखा
राधा तेरी चुनरी जो लहराये
छेड़ ने को कान्हा मचल जाए

तेरे संग राधा मेरी जोड़ी जमे गी
तेरी मीठी बातो में न राधा फसे गी
बरसाने आऊंगा बंसी बजाऊ गा मुरली की तान पे मैं तुम को नचाऊ गा,
मेरे आगे नही तेरी चाल चल पाए
राधा तेरी चुनरी जो लहराये

रूठो न राधे मेरी मान भी जाओ
नटखट कान्हा मेरे पास न आओ
जो तू कहे गी प्यारी मैं मान जाऊँगा वादा है तुम से मेरा अब न सताऊ गा,
बंसी जो भाजाये तो चुनर उड़ जाए
राधा तेरी चुनरी जो लहराये……………..

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