श्याम तेरी जब बंशी बोले सब जग हुआ दीवाना,
मेरा कौन ठिकाना मेरा कौन ठिकाना,
जहाँ बिताए बचपन और जहाँ साथ साथ में खेला,
उसको भी ना समझ में आए गिरवर तेरी लीला,
युग युग से जो प्रेम में डूबा उसका प्यास बुझे ना,
मेरा कौन ठिकाना……
देती है आवाज़ तुझे अब भी यशोदा मैया,
लेती है छुप छुप के सखिया तेरी आज बलैया,
राधा नही दीवानी सारा गोकुल हुआ दीवाना,
मेरा कौन ठिकाना…..
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे ढूँढूँ रे सांवरिया
कान्हा – कान्हा रट के मैं तो हो गई रे बावरिया
बेदर्दी मोहन ने मोहे फूँका ग़म की आग में
बिरहा की चिंगारी भर दी दुखिया के सुहाग में
पल-पल मनवा रोए छलके नैनों की गगरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
आई थी अँखियों में लेकर सपने क्या-क्या प्यार के
जाती हूँ दो आँसू लेकर आशाएं सब हार के
दुनिया के मेले में लुट गई जीवन की गठरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
दर्शन के दो भूखे नैना जीवन भर न सोएंगे
बिछड़े साजन तुमरे कारण रातों को हम रोएंगे
अब न जाने रामा कैसे बीतेगी उमरिया
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे…
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