हार है पर जीते गे सरकार तेरे द्वार में ,तेरे रेहते डूब न सकती नैया ये मजधार में,आजा रे कन्हिया देर न कर अब आजा रे, हार के आते जो तेरे दर पे देता उसे सहारा है,शरण तेरी पा के मेरे बाबा हसता गम का मारा हैआज है बारी मेरी तेरे सेवक की लम्बी कतार में,तेरे रेहते डूब न सकती …
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