मस्ती मस्ती साईं की मुझे मस्ती मस्ती,जब बाबा बुलायेगे शिर्डी की बस्ती मेंहम बैठ के जायेगे ईमान की कश्ती में,अपनी मस्ती मस्ती मस्ती में……. हमी दोनों हुस्नो इश्क की दुनिया के है मालिकजो तू अर्जी मैं फरशी फलक तेरा जमीन मेरीउधर तू दर न खोले गा इधर मैं घर न छोडू गाहुकमत अपनी अपनी है वाहा तेरी याहा मेरीअपनी मस्ती …
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