म्हारा श्याम बहादुर जी, थे कैयां पट खुलवाया सेवक से मांगी चाबी जद, वो करदी इनकारसेवक बोल्यौ खुद खुलवाल्यो, बाबो थारो यारम्हारा श्याम बहादुर जी, थे कैयां पट खुलवाया इतनी सुनकर गुरू वर बोल्या, अब कोनी दरकारम्हारो बाबा खुद खोलेगो, अपनों यो दरबारम्हारा श्याम बहादुर जी, थे कैयां पट खुलवाया जय जयकार करी भगता नै, बाबो हांसन लाग्योबांको बालक जिद …
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