ना स्वर है ना सरगम, ना लय ना तराना है, हनुमान के चरनो मे एक फूल चढ़ना है, ना स्वर है ना सरगम, ना लय ना तराना है, हनुमान के चरनो मे एक फूल चढ़ना है, जब बाल रूप मे प्रभु, सूरज को निगल डाले, अभिमानी सुर्पति के सब मर्द मसल डाले, बजरंग हुए तब से संसार ने जाना है, ना स्वर …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…