हरि-हर, शिव-विष्णु एक ही आदिशक्ति के दो स्वरुप, एक पालन करते हैं, दूसरा नवसृजन के पहले विनाश करते हैं। सृष्टि की यही कार्यप्रणाली स्थापित की गई है। एक ही दिव्य ज्योति से दोनो ही प्रकट हुए हैं। दोनो में न कोई भेद है और न ही कोई अंतर। भगवान विष्णु को भजे बिना शिव प्रसन्न नहीं होते और महादेव के …
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पैरों के निशान
जन्म से ठीक पहले एक बालक भगवान से कहता है,” प्रभु आप मुझे नया जन्म मत दीजिये , मुझे पता है पृथ्वी पर बहुत बुरे लोग रहते है…. मैं वहाँ नहीं जाना चाहता …” और ऐसा कह कर वह उदास होकर बैठ जाता है । भगवान् स्नेह पूर्वक उसके सर पर हाथ फेरते हैं और सृष्टि के नियमानुसार उसे जन्म …
Read More »मनु – शतरुपा को वरदान
सृष्टि के आदि में पितामह ब्रह्मा ने सर्व प्रथम स्वयंभू मनु और शतरुपा की सृष्टि की। आगे चलकर इन्हीं भाग्यवान दम्पति के द्वारा सृष्टि का विस्तार हुआ। उनके सदाचार, शील तथा पवित्र धर्माचरण के विषय में आज भी श्रुतियो में वर्णन मिलता है। हम सभी मानव उन्हीं मनु एवं शतरुपा की सन्तान हैं। इनके सबसे बड़े पुत्र का नाम …
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पौराणिक कथाओं, प्रेरक क्षण, मंदिरों, धर्मों, फिल्मों, हस्तियों के बारे में दिलचस्प जानकारी, हजारों गाने, भजन, आरती के बोल हैं Your wish may come true today…